मैं अटल हूँ

शिवम् सिंह सिसौदिया`अश्रु`
ग्वालियर(मध्यप्रदेश)

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विहंगों-सा चहकता मैं,
      चाँद-सा और चमकता मैं,
विद्युत लड़ी की माल-सा,
     और दामिनी-सा दमकता मैं।
मैं चपल हूँ,मैं चपल हूँ,मैं अटल हूँ॥
मैं विवस्वत के वलय-सा,
       सिंधु में आती प्रलय-सा,
मैं निडर हूँ सिंह-सा और,
      अडिग हूँ मैं हिमालय-सा।
मैं अचल हूँ,मैं अचल हूँ,मैं अटल हूँ॥
सूर्य की एक ज्वाल जैसा,
        अंगार की मैं माल जैसा,
काल से डरता नहीं मैं,
          काल के भी काल जैसा।
मैं प्रबल हूँ,मैं प्रबल हूँ,मैं अटल हूँ॥
 भार्गव परशु का खण्ड हूँ,
         पावक-सा भी प्रचण्ड हूँ,
श्रीकृष्ण के वचनों से जाना,
         मैं आत्मा अखण्ड हूँ।
मैं धवल हूँ,मैं धवल हूँ,मैं अटल हूँ॥
मृत्यु से क्योंकर डरूँ मैं,
          शत्रु का भय क्यों करूँ मैं,
जीवन हूँ चिर मैं नित्य हूँ,
  हर क्षण को ही फिर क्यों मरूँ मैं ?
मैं सबल हूँ,मैं सबल हूँ,मैं अटल हूँ॥
परिचय-शिवम् सिंह सिसौदिया का साहित्यिक उपनाम `अश्रु` है l इनकी जन्म तारीख २६ जनबरी १९९५ एवं ग्वालियर(म.प्र.)में जन्मे हैंl वर्तमान में बहोड़ापुर(ग्वालियर)में बसे हुए हैंl हिन्दी, संस्कृत व अंग्रेजी भाषा का ज्ञान रखने वाले श्री सिसौदिया की शिक्षा बी.कॉम. व एम.ए.(संस्कृत)हैl यह कार्यक्षेत्र में निजी शाला में अध्यापक हैंl सामाजिक गतिविधि के अंतर्गत अंतरराष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ में दीक्षित हैंl आपकी लेखन विधा-काव्य(कविता,गीत,ग़ज़ल,लेख,दोहे,सवैया आदि)हैl पत्रिका में लेख व कविताएँ प्रकाशित हुई हैंl इनको कुछ साहित्यिक प्रतियोगिताओं में प्रथम,द्वितीय व तृतीय स्थान पर पुरस्कृत किया गया है तो ग्वालियर में सप्तम शिक्षक सम्मान समारोह सितम्बर २०१८) एवं अगस्त २०११ में ग्वालियर में तुलसी मानस प्रतियोगिता में द्वितीय स्थान आदि प्राप्त हैl ब्लॉग पर भी अपनी बात रख्गने वाले अश्रु की विशेष उपलब्धि मध्य भारतीय हिन्दी साहित्य सभा(ग्वालियर) से सम्मान मिलना हैl इनकी लेखनी का उद्देश्य-हिन्दी भाषा,धर्म,भक्ति,साहित्य और भारतीय संस्कृति का प्रचार-प्रसार तथा निजी हृदय भावों को व्यक्त करने के साथ भी हिन्दी भाषा को राष्ट्रभाषा का दर्जा दिलवाना हैl आपके लिए प्रेरणा पुंज-भगवान श्री कृष्ण,गुप्त व्यक्ति,रसखान,सूरदास,तुलसीदास,मीराबाई,चैतन्य महाप्रभु, बिहारी जी,दिनकर जी,निराला जी,महादेवी वर्मा और डॉ.कुमार विश्वास हैl इनकी विशेषज्ञता-हिन्दी व संस्कृत का ज्ञान और चित्रकला में हैl

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