मैं किसान

सोनू कुमार मिश्रा
दरभंगा (बिहार)
*************************************************************************
तपन में तपकर
ठंड में ठिठुरकर,
बारिश में भींगकर
पसीना बहाकर,
खेत को सींचकर
अन्न मैं उपजाता हूँ।
मैं भारत का किसान,
खाली पेट भर जाता हूँ॥
श्रृंगार हल का
बीज से फल का,
सींच धरा को
मेहनत करके,
लहू को गर्मकर
बंजर भूमि से,
अन्न मैं उपजाता हूँ।
मैं भारत का किसान,
खाली पेट भर जाता हूँ॥
खुले गगन में
बिखरे चमन में,
आपसी चमन में
सैय्या खाट पर,
पंगडंडी की राह पर
नमक रोटी खाकर,
बच्चों को सुलाकर
सवेरे उठकर,
बसुंधरा को चीरकर
अन्न मैं उपजाता हूँ।
मैं भारत का किसान,
खाली पेट भर जाता हूँ॥
मन को मसोसकर
लालच को तोड़कर,
गरीबी की राह पर
अमीरी को त्यागकर,
स्वप्न को सजाकर
चिंता को हटाकर,
झोपड़ी में रहकर
संसद के बजट पर,
मीडिया के समाचार पर
आम के अचार पर,
भारतीय संस्कार पर
धारा की हठता से टकराकर,
आंधी तूफान को ललकार कर
मैं अन्न उपजाता हूँ।
मैं भारत का किसान,
खाली पेट भर जाता हूँ॥
नेताओं के आश्वासन से
विज्ञान के शासन से,
जीवन के संघर्ष से
बैलों के हर्ष से,
अनाज के दाम से
बागों के आम से,
गृहिणी की दुत्कार से
मातृभूमि के प्यार से,
देश के उत्थान से
नव तकनीकी समाधान से,
मैं अन्न उपजाता हूँ।
मैं भारत का किसान,
खाली पेट भर जाता हूँ॥
परिचय-सोनू कुमार मिश्रा की जन्म तारीख १५ फरवरी १९९३ तथा जन्म स्थान दरभंगा(बिहार )है। वर्तमान में ग्राम थलवारा(जिला दरभंगा)में रहते हैं। बिहार राज्य के श्री मिश्रा की शिक्षा -स्नातकोत्तर(हिंदी) है। आप कार्यक्षेत्र में शिक्षक हैं। सामाजिक गतिविधि के तहत समाजसेवी हैं। लेखन विधा-कविता है। इनकी लेखनी का उद्देश्य-सामाजिक चेतना जागृत करना औऱ वर्तमान में मातृभाषा हिन्दी का प्रचार करना है। 

Hits: 374

आपकी प्रतिक्रिया दें.