मैं केवल नारी हूँ

वन्दना शर्मा
अजमेर (राजस्थान)

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मैं नदी नहीं,जो अस्तित्व खोकर सागर में मिल जाऊँ,
मैं लहर भी नहीं,जो टकराकर वापस आ जाऊँ।
मैं फूल नहीं,जो मुरझा जाऊँ,
मैं कल्पना नहीं,जो निराधार रह जाऊँ।
मैं ग्रंथ नहीं,जो कलम-दवात से लिखा जाऊँ,
ना ही वाणी हूँ,जो शब्दों में बाँधी जाऊँ।
मैं मूरत भी नहीं,जो चुपचाप सहती जाऊँ,
मैं अबला तो कतई नहीं,जो बलशाली से डर जाऊँ।
महिला सशक्तिकरण के नए अपमान का घूँट मैं कैसे पी जाऊँ,
अबला के तिरस्कार पर सबला का लेप लगवाऊँ।
कौन कहता है जमाना बदल गया,
बदला है तो केवल शब्दों का दाँव।
महिला सशक्तिकरण की बात करने वालों,
आज भी तुम सबल और सशक्त के आवरण में व्यंग्य कर रहे हो।
तुम कतई नहीं बदले,
बदला है तो बात को कहने का ढंग।
मैं केवल नारी हूँ,
मुझसे नारी होने का हक ना छीनो।
मैं केवल नारी हूँ,
जो सदा सर्वदा से थी है,और रहेगी,
यही अटल सत्य है॥
परिचय-वंदना शर्मा की जन्म तारीख १ मई १९८६ और जन्म स्थान-गंडाला(बहरोड़,अलवर)हैl वर्तमान में आप पाली में रहती हैंl स्थाई पता-अजमेर का हैl राजस्थान के अजमेर से सम्बन्ध रखने वाली वंदना शर्मा की शिक्षा-हिंदी में स्नातकोत्तर और बी.एड. हैl आपका कार्यक्षेत्र-नौकरी के लिए प्रयासरत होना हैl लेखन विधा-मुक्त छंद कविता हैl इनकी लेखनी का उद्देश्य- स्वान्तःसुखाय तथा लोकहित हैl जीवन में प्रेरणा पुंज-गुरुजी हैंl वंदना जी की रुचि-लेखन एवं अध्यापन में हैl

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1 Comment

  1. नारी शक्ति का रुप है
    आपकी रचना बहुत खूब है।

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