मैं मजदूर हूँ…

डोमन निषाद
बेमेतरा(छत्तीसगढ़)

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मजबूर हूँ,
श्रम पर निर्भर हूँ।
क्या करूँ,बेसहारा हूँ,
मगर गंदी नाली का कीड़ा न समझो।
भाई साहब! मैं मजदूर हूँ…॥

भूखा रहकर सोया करता हूँ,
पर किसी का निवाला नहीं छीनता हूँ।
दाने-दाने के लिए तरस जाता हूँ,
दो वक्त रोटी जुटाने को।
भाई साहब! मैं मजदूर हूँ…॥

फटी हुई कमीज पहन लेता हूँ,
सरल स्वभाव जीवन जीता हूँ।
न घमंड है, बेजुबान हूँ,
कैसे समझाऊँ दुनिया वालों को।
भाई साहब! मैं मजदूर हूँ…॥

अब क्या कहूँ,
और किसे सुनाऊँ।
बस बनी हुई कहानी हूँ,
उदाहरण समझाने को।
भाई साहब! मैं मजदूर हूँ…॥

बड़े-बड़े अक्षरों में लिखाया हूँ,
विभिन्न पुस्तकों पे छपा हूँ।
शब्दों से संक्षिप्त हूँ,
जीवनशैली दिखाने को।
भाई साहब! मैं मजदूर हूँ…॥

हे प्रभु! कुछ मांगता हूँ,
ऋण इतना है,कृपा करो कि चुका सकूँ।
उम्मीद जितनी हो,उतना बन जाऊँ,
बस तमन्ना है,इतनी ही पाने को।
भाई साहब! मैं मजदूर हूँ…॥

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