मैं हूँ न

डॉ.पूर्णिमा मंडलोई
इंदौर(मध्यप्रदेश)

*****************************************************

अक्सर शालू के पति राज उससे कहा करते थे कि,बेटा जब अच्छी नौकरी करने लगेगा,तब मैं समय से पूर्व स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले लूंगा। शालू इस बात को मजाक समझी थी,पर आज
जब शालू और राज अपने बेटे को विमानतल पर छोड़कर जैसे ही कार में बैठे,शालू को ऐसा लगा कि,राज कुछ कहना चाहते हैं मगर कुछ कहा नहीं।दोनों चुपचाप बैठे रहे। दोनों का मन
बहुत ही दुःखी था,क्योंकि उनका बेटा बहुत ही होनहार हैl बी.ई. की उपाधि लेने के बाद मुम्बई में एक साधारण-सी नौकरी कर रहा है,जबकि उसके दोस्त पढ़ाई में सामान्य होेते हुए भी सभी
उच्च पदों पर पदस्थ हो गए हैं। शालू और राज ने बहुत समझाया था कि,आगे पढ़ाई जारी रखकर स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त करो,ताकि अच्छी नौकरी पा सको,परन्तु उसने माता-पिता की
बात नहीं मानी।
कार घर की तरफ बढ़ रही थी,सहसा राज ने दुःखी मन से शालू से कहा-`मैंने सोचा था बेटा अच्छी नौकरी कर अच्छी कमाई करेगा,तब मैं स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले लूंगा।` ये सुनकर आज शालू को लगा कि,ये मजाक नहीं हैl शालू ने राज के हाथों को थामकर कहा-`आप चिंता न करें,`मैं हूँ नl` आपकी जब इच्छा हो,आप सेवानिवृत्ति ले लेना,मैं कमाऊंगी।` इतना कहते हुए शालू की आँख भर आईl

परिचय-डॉ.पूर्णिमा मण्डलोई का जन्म १० जून १९६७ को हुआ है। आपने एम.एस.सी.(प्राणी शास्त्र),एम.ए.(हिन्दी), एम.एड. करने के बाद पी.एच-डी. की उपाधि(शिक्षा) प्राप्त की है। वर्तमान में डॉ.मण्डलोई मध्यप्रदेश के इंदौर स्थित सुखलिया में निवासरत हैं। आपने १९९२ से शिक्षा विभाग में व्याख्याता के पद पर लगातार अध्यापन कार्य करते हुए विद्यार्थियों को पाठय सहगामी गतिविधियों में मार्गदर्शन देकर राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर सफलता दिलाई है। विज्ञान विषय पर अनेक कार्यशाला-प्रतियोगिताओं में सहभागिता करके पुरस्कार प्राप्त किए हैं। २०१० में राज्य विज्ञान शिक्षा संस्थान(जबलपुर) एवं मध्यप्रदेश विज्ञान परिषद(भोपाल) द्वारा विज्ञान नवाचार पुरस्कार एवं २५ हजार की राशि से आपको सम्मानित किया गया हैl वर्तमान में आप जिला शिक्षा केन्द्र में प्रतिनियुक्ति पर सहायक परियोजना समन्वयक के रुप में सेवाएं दे रही हैंl कई वर्ष से लेखन कार्य के चलते विद्यालय सहित अन्य तथा शोध संबधी पत्र-पत्रिकाओं में लेख एवं कविता प्रकाशित हो रहे हैं। आपकी लेखनी का उद्देश्य अपने लेखन कार्य से समाज में जन-जन तक अपनी बात को पहुंचाकर परिवर्तन लाना है।

Hits: 36

आपकी प्रतिक्रिया दें.