मोदी जी अपने वादों में तो नहीं फँंस गए ?

डॉ.अरविन्द जैन
भोपाल(मध्यप्रदेश)
*****************************************************
एक प्रेमिका ने अपने प्रेमी से पूछा,-`तुम मेरे लिए आसमान से तारे तोड़कर ला सकते हो ?` प्रेमी बोला,-`हाँ,पर अभी नहीं,अभी तो बगीचे के फूल लेकर आ सकता हूँl` एक दोस्त परीक्षा दे रहा था,वो आधे समय के बाद बोला,-`ये तो नहीं बन रहा है,कल की तैयारी करने जा रहा हूँl` 

कहा भी जाता है कि-
`वो वादे पर आएं न आएंग,कोई बात नहीं,
बात कहने को रह गई,और वक़्त गुजर गयाl`
राजशाही में राजा पहले अपने कोषाध्यक्ष से पूछते थे कि हमें किस मद से कितना धन खर्च करना है ? उस हिसाब से राजा घोषणा करते थे और योजना पूरी होने तक चिंता रखते थेl  एक घटना प्रजातंत्र की याद आ रही हैl एक जिले में एक पुल का शिलान्यास कम-से-कम पाँच बार हुआl कभी विधायक,कभी मंत्री और यहाँ तक की मुख्यमंत्री ने भी किया,पर बजट न होने से पुल नहीं बना,किन्तु शिलान्यास होने पर माला पहनी और तालियां बजींl
चुनाव के समय चुनावी वादों की भरमार होती है,ठीक वैसे ही जैसे नागपंचमी के पहले अखाड़े में नए-नए पहलवान आते हैं और नागपंचमी के बाद कहाँ लुप्त हो जाते हैं,पता नहीं! आज जैसे कर्नाटक के चुनाव में सरकार और विपक्ष जो भी हैं,खुले दिल से इतनी अधिक घोषणाएं कर रहे हैं जैसे कुबेर का खजाना मिल जाएगा और सबकी मांग पूरी कर देंगेl इन्हीं लोगों को फिर जीतने के बाद वादा पूरा करने में पसीना आता हैl वहाँं सीना काम नहीं आताl पैसा कहाँ से आएगा,किसी को नहीं पता,पर घोषणा करना चुनाव में मौलिक धर्म हैl कई मुख्यमंत्री तो घोषणा वीर कहलाते हैंl कई बार जो विपक्ष में रहते हैं,वे सत्ता पक्ष की कई नीतियों का खुलकर विरोध करते हैं और सत्ता में आने पर पुरानी सरकार की नीतियों को लागू करने में परहेज़ नहीं करतेl कभी-कभी नई सरकार अपने वादों को पूरा न कर पाने पर विपक्ष को दोष देती हैl  जैसे साधु और भिखारी दोनों वस्त्रहीन होते हैं,एक दोनों हाथ से भीख मांगता हैं और एक आशीर्वाद देता हैl पक्ष में रहते हैं तो कहते हैं कि हम करेंगे और विपक्ष में होते हैं तो कहते हैं सरकार को ऐसा करना चाहिएl
मोदी सरकार को सत्ता में आए अमूमन सैंतालीस माह हो चुके हैंl जब सत्ता में आए,तब उन्होंने अपने वादों को पूरा करने में जी-जान से कोशिश की और बहुत हद तक उपलब्धि मिली| मोदी जी की￰ परिकल्पना विश्वस्तरीय भारत को प्रतिस्थापित करना हैl हम फिर से स्वर्ण युग में जाना चाहते हैं, इस हेतु पुरजोर मेहनत की और योजनाएं बनाई गई हैं,पर कमजोर विपक्ष के कारण सफलता नहीं मिल पा रही हैl वैसे मोदी जी ने पुरानी शराब को नई बोतल में प्रस्तुत किया हैl भारत बड़ा देश है,यहाँ की योजनाएंँ समय लेती हैंl समय पर किसी का वश नहीं है और अब समय कम बचा है मोदी जी के पासl
सबसे पहला वादा किया गया था कि,सबसे पहले विदेशों में जमा पैसा जिसे `काला धन` कहते हैं,वापिस लाएंगे और पंद्रह लाख प्रति नागरिक के खातों में जमा होंगे और सबके खाते भी खुले हैं और पैसा आने वाला हैl वादा किया था पर पूरा हो न हो,यह कोई जरुरी नहीं हैl मोदी जी जब विपक्ष में थे,तब उन्होंने प्रत्यक्ष विदेशी निवेश(एफडीआई) का विरोध किया था,आज वह उनका प्रिय विषय हैl `जीएसटी` के लिए कई सत्र विरोध की बलि चढ़ गए,पर आने के बाद उस पर अमल किया और आज भी नियमों में परिवर्तन करते जा रहे हैंl इसके साथ ही विमुद्रीकरण का बढ़िया प्रयोग हुआ,जो अधिक सफल हुआl इसके कारण कई लोगों को मौत का सामना करना पड़ा,लम्बी कतार में लगे और धन जितना सरकार के पास था,उससे अधिक बाहर आ गयाl नए रुपए छापने में अधिक रुपए खर्च किए गए और आज सब जगह आराम हैl  क्या करें ?,व्यापारी तो चोर होते ही हैं और उनसे ही चुनाव में चंदा मिलता हैl अब और अधिक मिल रहा है,इसीलिए दल सबसे धनवान दल हैl विकास की दर पर सरकार और जनता हैl व्यापारी शांति महसूस कर रहे हैं,जैसे कहा भी जाता है-`सिर मुंडाते ही ओले पड़े`l नोटबंदी और जीएसटी की मेहनत से बेचारे जेटली जी को किडनी का ऑपरेशन कराना पड़ा और विदेश दौरों में न जा पाने से सुषमा जी को भी रोगग्रस्त होना पड़ाl वैसे बीमारी से कोई नहीं बच पाता,पर ईश्वर किसी को बीमार न करेl
मोदी सरकार ने `आधार` पत्र का विरोध किया और आज उसकी सबसे अधिक उपयोगिता बता रहे हैंl प्रधानमंत्री को सोचना चाहिए कि ‘नींव के पत्थर कभी मीनार नहीं देखतेl’ आज जितनी भी भूमिका मिली है,वह पुरानी सरकार की ही देन हैl इसी प्रकार `मनरेगा` का भी दोहन हो रहा है,जबकि उसका भी विरोध किया गया थाl भारत की जीवन रेखा रेल की व्यवस्था तो विश्वस्तरीय हो गई हैl ज्यों-ज्यों इलाज़ हो रहा,बीमारी बढ़ती जा रही हैl रेल का किराया निरन्तर बढ़ रहा है,गुणवत्ता तो किसी से छिपी नहीं हैंl फिर चाहे खाना सेवा,लेटलतीफी,दुर्घटना हो,सबमें बहुत सुधार हुआ हैl वर्तमान सरकार कब तक पुरानी सरकार को कोसेगी कि उनके द्वारा किया गया कर्म हम भोग रहे हैंl जैसे-‘विधवा और ऊपर से गर्भवती’,ऐसी ही हालत वर्तमान सरकार की है जब भी कुछ अच्छा हुआ तो मेरा और ख़राब हुआ तो पुरानी सरकार काl जब कीर्ति मिलती है तब प्रसन्नता और अपकीर्ति में अप्रसन्नता क्यों ?
अब मोदी जी के पास एक वर्ष का समय बचा है, जिससे वे अपने किए गए वचन पूरे करेंगेl वचन स्वयं ने दिए हैं तो पूरा करें,अन्यथा आप सफल नहीं माने जाएंगेl विदेश स्तर  पर आपकी प्रतिष्ठा बहुत अच्छी रही है,जिससे भी दोस्ती करते हैं भरोसे से और फिर वही आपकी पीठ पर छुरा भौंकता हैl जैसे- चीन आपका माल नहीं लेता और अपना माल निरंतर भेज रहा है, जबकि आपने दीपावली के समय चीन के सामान का बहिष्कार करने को कहाl अमेरिका एक व्यापारी है न कि दोस्त,उससे हथियार खरीदने के कारण ही वह अच्छा व्यवहार करता हैl अगर हम भी सौदा रद्द कर दें,तो वह अपनी असलियत पर आ जाएगाl अब कोई भी नई योजना बनाएं तो उस पर गहन विचार करें, तत्पश्चात ही क्रियान्वयन करेंl
आपके आने से देश में अभूतपूर्व परिवर्तन हुआ है जैसे- सबसे पहले भ्रष्टाचार पर अंकुश लगा,स्वच्छता पर ध्यान दिया गया,कालेधन पर नियंत्रण हुआ,`आधार` की उपयोगिता बढ़ाई, नोटबंदी और जीएसटी से बहुत व्यापार बढ़ा और बैंकों द्वारा बहुत धन बाँटा जा रहा हैl कुल मिलाकर बात ऐसी है-
`आपके ज़माने में कोई कांड नहीं हुए
कोई भागे तो वे पुरानी सरकार के रहे,
आप जैसा पाक साफ़ मिला न इस देश में
बस आप तो राज्यों से पूर्ति करा लेते हैं,
और पूरे ईमानदार रहते हैं
राज्यों में कितना है भ्रष्टाचार,
ये शायद आपको मालूम  नहीं
मालूम होने पर क्यों नहीं बदले गए,
आज तक ?
दूध देने वाली गाय की लातें अच्छी
लगती हैंl`
परिचय- डॉ.अरविन्द जैन का जन्म १४ मार्च १९५१ को हुआ है। वर्तमान में आप होशंगाबाद रोड भोपाल में रहते हैं। मध्यप्रदेश के राजाओं वाले शहर भोपाल निवासी डॉ.जैन की शिक्षा बीएएमएस(स्वर्ण पदक ) एम.ए.एम.एस. है। कार्य क्षेत्र में आप सेवानिवृत्त उप संचालक(आयुर्वेद)हैं। सामाजिक गतिविधियों में शाकाहार परिषद् के वर्ष १९८५ से संस्थापक हैं। साथ ही एनआईएमए और हिंदी भवन,हिंदी साहित्य अकादमी सहित कई संस्थाओं से जुड़े हुए हैं। आपकी लेखन विधा-उपन्यास, स्तम्भ तथा लेख की है। प्रकाशन में आपके खाते में-आनंद,कही अनकही,चार इमली,चौपाल तथा चतुर्भुज आदि हैं। बतौर पुरस्कार लगभग १२ सम्मान-तुलसी साहित्य अकादमी,श्री अम्बिकाप्रसाद दिव्य,वरिष्ठ साहित्कार,उत्कृष्ट चिकित्सक,पूर्वोत्तर साहित्य अकादमी() आदि हैं। आपके लेखन का उद्देश्य-अपनी अभिव्यक्ति द्वारा सामाजिक चेतना लाना और आत्म संतुष्टि है।

Hits: 33

आपकी प्रतिक्रिया दें.