मोदी सरकार का सपना कौशल विकास

डॉ.सोना सिंह 
इंदौर(मध्यप्रदेश)
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१५ जुलाई -विश्व युवा कौशल दिवस विशेष
युवाओं में कौशल(स्किल) के प्रति रूझान बढ़ाने और कौशल के माध्यम से सफलता हासिल करना ‘युवा कौशल दिवस’ का उद्देश्य है। इसके माध्यम से युवा स्वयं सशक्त होकर समाज के सशक्तिकरण का कार्य कर सकेंगें। सतत विकास और मानव अधिकारों के चलते संयुक्त राष्ट्र की सामान्य सभा ने विश्व युवा कौशल दिवस की अवधारणा को प्रारंभ किया। विश्व में बेरोजगारी के आंकड़ों से त्रस्त होकर यूनेस्को तथा संयुक्त राष्ट्र ने तय किया कि बेरोजगारी के प्रमुख कारणों में से एक कारण है शिक्षा का स्तरहीन और कौशलहीन होना। विश्व में शिक्षा और प्रशिक्षण के महत्व को बल देते हुए संयुक्त राष्ट्र ने कहा कि २०३० तक के लिए सतत विकास में इन्हीं दो मापदंडों को रखा गया है। दुनिया में रोजगार के क्षेत्र में होने वाले पक्षपातों का सबसे बड़ा कारण प्रशिक्षण का अभाव है। अधिक वय के लोगों के अनुभव का लाभ लेकर भी पारिश्रमिक तुलनात्मक रूप से सही नहीं है। महिलाओं को कम तथा वेतन नहीं के बराबर दिया जाता है। युवाओं में अकुशल जनसंख्या का शोषण जारी है, इसीलिए विश्व बाजार में शिक्षा के साथ प्रशिक्षण को महत्वपूर्ण बिन्दू माना है, परंतु वर्तमान व्यवस्था इन आवश्यकताओं को पूर्ण नहीं करती है। वैश्विक सर्वेक्षण को देखें तो युवाओं के सामान्य शिक्षित होने में स्तरीयता नहीं है।

भारत सरकार ने इस दिवस को अपने देश के लिए एक अभियान की तरह लिया है। इसका कारण है पूरी दुनिया की सबसे बड़ी आबादी,जिनमें युवाओं की संख्या भी सर्वाधिक रहेगी। ऐसे में युवाओं को उनकी शक्ति और क्षमता का पूरा प्रतिफल प्राप्त हो। कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय ने १५ जुलाई २०१५ को कौशल  भारत अभियान का शुभारंभ किया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना की शुरूआत की गई है। इस अभियान का लक्ष्य है संपूर्ण भारत में होने वाली कौशल गतिविधियों का समेकिकरण, समन्वय,अवलोकन,क्रियान्वयन तथा मूल्यांकन करना। यह योजना मांग का निर्माण करने तथा पुरस्कार आधारित कौशल प्रशिक्षण योजनाओं के साथ प्रतिभागियों को कौशल प्रशिक्षण सफलतापूर्वक संपूर्ण करने पर आर्थिक लाभ देने को समाहित किए हुए हैं। प्रत्येक साल इसके माध्यम से २६ लाख से अधिक युवाओं को लाभान्वित किए जाने का लक्ष्य रखा गया है। कौशल  विकास के माध्यम से पूरे देश में कौशल के माध्यम से गति,मापदंड तथा वेतनमानों को प्राप्त करने का लक्ष्य रखा गया है। इस अभियान के माध्यम से देष के संस्थानों में रोजगारमूलक पाठ्यक्रमों को प्रारंभ किया गया है। देशभर में कौशल विकास को सफल बनाने के लिए केन्द्र सरकार,राज्य सरकारें,समितियां तथा संस्थान इससे संबंधित गतिविधियों को चलाते रहते हैं। इसमें संस्थागत प्रशिक्षण,अधोसंरचना,समेकिकरण, प्रशिक्षण,वैश्विक रोजगार,सतत जीवन स्तर आदि हैं। इनका प्रमुख कार्य अन्वेषण आधारित विचारों,प्रकल्पों को बढ़ावा देना है,जिससे कौशल विकास किया जा सके। इसके लिए एक समीक्षा समिति भी बनाई गई है। राष्ट्रीय कौशल विकास समिति में भारत के युवाओं में कौशल विकास करने के लिए प्रत्येक साल बजट भी निर्धारित किया जाता है। इसके लिए मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय कौशल विकास समिति बनाई गई है। यह समिति पंजीयन अधिनियम १८६० के तहत पंजीयत है। इसके उद्देश्य हैं-
कौशल विकास के सभी लक्ष्यों को प्राप्त किया जाए,सरकार तथा गैर सरकारी संगठनों तथा समितियों के मध्य समरसतापूर्ण समन्वय की स्थापना हो,
कौशल विकास में मापदंडों को वर्तमान बाजार की मांग के अनुरुप ही रखा जाए,कौशल विकास के लिए बजट का निर्माण,वृद्धि तथा निजी और अंतरराष्ट्रीय संसाधनों को जुटाया जाए,वर्तमान कौशल विकास योजनाओं का मूल्यांकन किया जाए तथा उन्हें प्रभावी तौर पर लागू किया जाए,इसके लिए राष्ट्रीय स्तर पर आंकड़ों का संग्रहण कर श्रम बाजार के विविध आयामों के साथ रखा जाए
और कौशल विकास अभियान में विकलांग,अनुसूचित जाति-जनजाति, पिछड़ा वर्ग तथा महिलाओं का विशेष ध्यान रखा जाए।
परिचय-डॉ.सोना सिंह का बसेरा मध्यप्रदेश के इंदौर में हैl संप्रति से आप देवी अहिल्या विश्वविद्यालय,इन्दौर के पत्रकारिता एवं जनसंचार अध्ययनशाला में व्याख्याताके रूप में कार्यरत हैंl यहां विभागाध्यक्ष रही डॉ.सिंह की रचनाओं का इंदौर से दिल्ली तक की पत्रिकाओं एवं दैनिक पत्रों में समय-समय पर आलेख,कविता तथा शोध पत्रों के रूप में प्रकाशन हो चुका है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के भारतेन्दु हरिशचंद्र राष्ट्रीय पुरस्कार से आप सम्मानित (पुस्तक-विकास संचार एवं अवधारणाएँ) हैं। आपने यूनीसेफ के लिए पुस्तक `जिंदगी जिंदाबाद` का सम्पादन भी किया है। व्यवहारिक और प्रायोगिक पत्रकारिता की पक्षधर डॉ.सिंह के ४० से अधिक शोध पत्रों का प्रकाशन,२०० समीक्षा आलेख तथा ५ पुस्तकों का लेखन-प्रकाशन हुआ है। जीवन की अनुभूतियों सहित प्रेम,सौंदर्य को देखना,उन सभी को पाठकों तक पहुंचाना और अपने स्तर पर साहित्य और भाषा की सेवा करना ही आपकी लेखनी का उद्देश्य है।

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