मोम कर दिया 

डाॅ.अचलेश्वर कुमार शुक्ल ‘प्रसून’ 
शाहजहाँपुर(उत्तरप्रदेश)
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शून्य था उर सदन शोर कर ही दिया।
गुन-गुनाकर मधुर भोर कर ही दियाll 
यामिनी में मेरे पास आ कामिनी।
उर तो पाषाण था मोम कर ही दियाll   
परिचय-डाॅ.अचलेश्वर कुमार शुक्ल का साहित्यिक उपनाम-प्रसून है। जन्मतिथि ५ जुलाई १९७५ तथा जन्म स्थान-ककरौआ जप्ती,शाहजहाँपुर (उ.प्र.)है। वर्तमान में यहीं निवासरत हैं। उत्तर प्रदेश वासी डॉ.शुक्ल की शिक्षा एम.ए.(संस्कृत,हिन्दी)सहित पी.एच-डी.(हिन्दी)है। आपका कार्यक्षेत्र प्राध्यापक (महाविद्यालय) का है। सामाजिक गतिविधि के अंतर्गत आप समय-समय पर विविध कार्यक्रमों के माध्यम से सामाजिक उन्नयन में सक्रिय रहते हैं। इनकी लेखन विधा-गद्य एवं पद्य में समान अभिनिवेश है। विविध पत्र-पत्रिकाओं में रचनाओं का प्रकाशन होने के साथ ही कई संस्थाओं से सम्मान प्राप्त हुआ है। आपकी लेखनी का उद्देश्य-सद्साहित्य का सृजन करना है।

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