हम होंठ सिल सहते रहे…

यशपाल निर्मल
गढ़ी बिशना (अखनूर,जम्मू)

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इस जहां में किसी को कोई ढंग का न मिला।
मुझे तुझसा न मिला, तुझे मुझसा न मिला॥
मैं तो धुत हूं अपने ही गम के नशे में साकी।
कि होश में आ जाऊं,तू और मुझको न पिला॥
बड़ी मुश्किल से बनाए हैं तिनका-तिनका चुन के।
महल सपनों के ढह जाएंगे,सोए हुओं को न हिला॥
वो दोस्त दगा देते रहे,हम होंठ सिल सहते रहे।
उनकी फितरत थी,हमें शिकवा है कोई न गिला॥
आदमी मुसाफिर है जिंदगी के सुहाने सफर का।
ठहरने को सराय चाहिए,कोई महल न किला॥
परिचय-हिन्दी,डोगरी एवं अंग्रेजी भाषा में विभिन्न विषयों पर करीब २५ पुस्तकें प्रकाशित करा चुके यशपाल जी का साहित्यिक उपनाम-यशपाल निर्मल है। जन्मतारीख-१५ अप्रैल १९७७ और जन्म स्थान-ज्यौड़ियां (जम्मू) है। आपका निवास ज्यौड़ियां के गढ़ी बिशना (अखनूर,जम्मू) में है। धरती के स्वर्ग जम्मू कश्मीर राज्य से रिश्ता रखने वाले यशपाल निर्मल की शिक्षा-एम.ए. तथा एम.फिल. है। आपका कार्यक्षेत्र-सहायक सम्पादक (जम्मू कश्मीर एकेडमी आफ आर्ट,कल्चरल एंड लैंग्वेजिज,जम्मू)का है। सामाजिक क्षेत्र में आप कई साहित्यक,सांस्कृतिक एवं सामाजिक संस्थाओं में सक्रिय रुप से सहयोगी हैं। इनकी लेखन विधा-लेख,कविता,कहानी एवं अनुवाद है। आपकी रचनाओं का प्रकाशन विविध माध्यमों में हुआ है। आपको सम्मान में साहित्य अकादमी का वर्ष २०१५ का अनुवाद पुरस्कार मिला है। आप ब्लॉग पर भी सक्रिय हैं। यशपाल निर्मल को कई संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया गया है। राष्ट्रीय स्तर पर आपकी पहचान डोगरी एवं हिंदी भाषा के युवा बाल साहित्यकार,लघुकथाकार, कवि,आलोचक और अनुवादक की है। आपको डोगरी,हिन्दी, पंजाबी,उर्दू एवं अंग्रेज़ी भाषा का भी ज्ञान है। आप कई भाषाओं में अनुवाद कार्य कर रहे हैं। १९९६ में निजी शाला में शिक्षक के रूप में व्यवसायिक जीवन की शुरुआत करने वाले यशपाल जी प्रतिष्ठित दैनिक समाचार पत्रों के साथ बतौर संवाददाता कार्य कर चुके हैं। दिसम्बर २००९ में जम्मू कश्मीर की कला,संस्कृति एवं भाषा एकेडमी में आप शोध सहायक के पद पर आए एवं २०१७ में सहायक सम्पादक नियुक्त हुए। आपने लेखन की शुरुआत १९९४ में की और १९९६ में पहला डोगरी कविता संग्रह ‘अनमोल जिंदड़ी’ प्रकाशित हुआ। अनुवाद कार्य, साहित्य सर्जन,समाजसेवा, पत्रकारिता और सांस्कृतिक क्षेत्रों में योगदान हेतु आपको कई सम्मान एवं पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं,जिनमें-नाटक ‘मियां डीडो’ पर वर्ष २०१४ का साहित्य अकादमी (नई दिल्ली)का राष्ट्रीय अनुवाद पुरस्कार, पत्रकारिता भारती सम्मान(२००४),जम्मू कश्मीर रत्न सम्मान (२०१०),लीला देवी स्मृति सम्मान(२०१२),राष्ट्रीय अनुवाद साहित्य गौरव सम्मान (२०१७),बाल साहित्य पुरस्कार(२०१८),साहित्य सेवी सम्मान(२०१८)एंव सर्व भाषा सम्मान(२०१८) प्रमुख हैं। आपकी चर्चित पुस्तकों में-अनमोल जिंदड़ी (डोगरी कविता संग्रह),पैहली गैं(कविता संकलन-सम्पादन),आओ डोगरी सिखचै, डोगरी व्याकरण”(२००९),दस लेख(लेख संग्रह-२०१५) सहित घड़ी,छुट्टियां (बाल उपन्यास-२०१८) तथा गागर ( लघुकथा संग्रह-प्रकाशनाधीन)हैं। सैंकड़ों लेख, कहानियां,लघु कथाएं एवं कविताएँ राज्य एवं राष्ट्र स्तर की पत्रिकाओं में प्रकाशित हैं। आप कई साहित्यक पत्रिकाओं में बतौर सम्मानित संपादक कार्यरत हैं। आपको कई साहित्यक एवं सांस्कृतिक संस्थाओं ने भी सम्मानित किया है। इनके लेखन का उद्देश्य-समाज में मानवता का संचार करना है|

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