यह भूमि है पुण्या…

शम्भूप्रसाद भट्ट `स्नेहिल’
पौड़ी(उत्तराखंड)

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उत्तराखंड की भूमि है पुण्या,
जय हो उत्तराखंड भूमि है धन्या।

उत्तराखंड में हैं तीर्थ स्थान,
बद्री-केदार हैं पवित्र धाम।
बैजनाथ कार्तिक स्वामी;
तीर्थ स्थान ये उत्तराखंड में ही।
उत्तराखंड की…॥

हिमालय है यहाँ श्वेत पहाड़ी,
पहाड़ियों के बीच ऊंची-पहाड़ी।
गंगा-यमुना का उद्गम स्थल है;
हरी धरती का सुंदर-सा वन है।
उत्तराखंड की…॥

मसूरी यहाँ पर पहाड़ों की रानी,
नैनीताल ताल में मीठा है पानी।
कुमों-गढ़ यह भूमि देवों की;
देवों के देव महादेव जी की।
उत्तराखंड की…॥

यहाँ से दिखती चौखम्बा पहाड़ी,
मन को है भाती यहाँ की बड़ाई।
धन्या है उत्तराखंड की यह भूमि;
जिसके सिर पर शुभ्र हिमाद्रि।
उत्तराखंड की…॥

परिचय-शम्भूप्रसाद भट्ट का साहित्यिक उपनाम-स्नेहिल हैl जन्मतिथि-२१आषाढ़ विक्रम संवत २०१८(४ जुलाई १९६१) और जन्मस्थान ग्राम भट्टवाड़ी (रूद्रप्रयाग,उत्तराखण्ड) हैl आप वर्तमान में उफल्डा(श्रीनगर पौड़ी,उत्तराखंड) में रहते हैं,जबकि स्थाई निवास ग्राम-पोस्ट-भट्टवाड़ी (जिला रूद्रप्रयाग) हैl उत्तराखण्ड राज्य से नाता रखने वाले श्री भट्ट कला एवं विधि विषय में स्नातक होने के सात ही प्रशिक्षु कर्मकाण्ड ज्योतिषी हैंl आप राजकीय सेवा से स्वैच्छिक रुप से सेवानिवृत्त हैंl  सामाजिक गतिविधि के अंतर्गत विविध साहित्यिक व सामाजिक संस्थाओं में प्रतिभागिता-सहयोगात्मक मदद करते हैंl शम्भूप्रसाद भट्ट की लेखन विधा-पद्यात्मकता तथा गद्यात्मकता के तहत सम-सामयिक लेख,समीक्षात्मक एवं शोध आलेख आदि हैl ३ पुस्तकें प्रकाशित होने के साथ ही तथा देश के अनेक पत्र-पत्रिकाओं में रचनाओं का प्रकाशन हुआ हैl आपको साहित्यिक-सामाजिक कार्योंं हेतु स्थानीय, राज्य, राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर ४० से अधिक उत्कृष्टतम सम्मान-पुरस्कार प्राप्त हुए हैंl साथ ही अलंकरणों से भी विभूषित हो चुके हैंl इनकी दृष्टि में विशेष उपलब्धि-सन्तुष्टिपूर्ण जीवन और साहित्यिक पहचान ही हैl श्री भट्ट की लेखनी का उद्देश्य-धर्म एवं आध्यात्म,वन एवं पर्यावरणीय,सम-सामयिक व्यवस्था तथा राष्ट्रवादी विचारधारा के साथ ही मातृभाषा हिंदी का बेहतर प्रचार-प्रसार करना हैl

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