ये आधुनिक हिंदुस्तान है…

नीरज सिंह राजपूत
बलिया (उत्तर प्रदेश)
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अब न कोई धर्म की बेड़ियां,न शर्म,न कोई लाज है,
बदल चुका ये वक़्त,बदल चुका इंसान है
मकान हो चुके बड़े,दिलों में जगह बची नहीं,
भरे हों धन के भंडार पर,अभी भूख है मिटी नहीं
गरीबों को सताकर ही,मिलती अब आन-बान-शान हैl
बदल चुकी है रीतियाँ,ये आधुनिक हिंदुस्तान है…ll

एक फ़िल्म के दृश्य पर जिनके ख़ून खौल जाता है,
पर जब चीखती है एक `आसिफ़ा`,सब मौन हो जाते हैं
निकल चलती है सड़कों पर,मोमबत्तियों की रैलियां,
पर घर पहुँच,मोमबत्ती बुझा,हम फिर से सो जाते हैं
समझना अब मुश्किल है,कौन इंसान,कौन हैवान हैl
बदल चुकी है रीतियाँ,ये…ll

हम अपनों से ही लड़ रहे हैं,जाति-पाति के नाम पर,
भड़क जाते हैं यहाँ,दंगे छोटी-छोटी बात पर
धर्म के रखवाले ही अब,कर रहे धर्म पर आघात है,
लोग भूल रहे अब इंसानियत,चंद रुपयों की सौगात पर
जहाँ पूजी जाती है देवियां,हो रहा नारी का अपमान हैl
बदल चुकी है रीतियाँ,ये…ll

न अब कोई उम्र का लिहाज़ है,न रिश्तों में बची शर्म है,
भाई,भाई का न रहा,अब पैसा ही सच्चा धर्म है
अब सवाजसेवा कुछ नहीं,सब मतों की भूख है,
पर आज भी एक कवि कर रहा अपना कर्म है
ये लेखन से ही हो सकता,इस समाज में सुधार हैl
बदल चुकी है रीतियां,ये आधुनिक हिंदुस्तान है…ll

परिचय-नीरज सिंह राजपूत की जन्मतिथि-१४ फरवरी १९९९ तथा जन्म स्थान-बलिया (उत्तर प्रदेश)है। वर्तमान में आप ग्राम ज़ीराबस्ती(बलिया)में रहते हैं। नीरज सिंह फिलहाल विद्यालय स्तर पर अध्ययनरत हैं। इनकी लेखन विधा-कविता,लेख और कहानी है। आपके लेखन का उद्देश्य-मन के भावों का प्रदर्शन करना है। 

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