राघव आ जाओ

 केशव कुमार मिश्रा ‘सम्राट’
 सिंगिया गोठ (मधुबनी,बिहार)
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श्रीराम तुम्हारे श्रीचरणों में,
मैं नित-नित शीष झुकाता हूँ।
मैं नित-नित शीष झुकाता हूँ,
अपनी बातें बतलाता हूँ।
मुझे कष्ट हजारों हैं राघव,
जिन्हें तुम्हें बताने आता हूँ।
मन की अभिलाषा को तुम,
भले!दरकिनार कर जाओ,
मुझे राम राज्य की चाहत है,
तुम फिर से राघव आ जाओ।
इस धरा के कष्टों को राघव,
अब फिर से तुम निबटा जाओ।
निःशक्त,निःसहाय,गरीबों को,
तुम अपनी दया दिखा जाओ,
इस धरा के रावण को फिर से,
उनकी औकात दिखा जाओ।
मैं चरण तुम्हारे पड़ा हुआ,
मुझे अपने गले लगा जाओ।
सब एक रहें-सब नेक बनें,
ये भाव सभी में जगा जाओ।
मेरी एक दिली तमन्ना है,
बस धरा को स्वर्ग बना जाओ।
तुम फिर से राघव आ जाओ,
तुम फिर से राघव आ जाओ॥
परिचय-केशव कुमार मिश्रा का निवास बिहार के सिंगिया गोठ (जिला मधुबनी)में है। दरभंगा में अस्थाई निवास है। पेशे से आप अधिवक्ता हैं। कविता लिखना आपका मनपसंद कार्य है। 

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