राज्य की भाषा को वास्तविक सम्मान दिलाने के लिए पहल करना होगी

निर्मलकुमार पाटोदी
इन्दौर(मध्यप्रदेश)
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महाराष्ट्र में सरकारी कामकाज में मराठी के ही इस्तेमाल का शासनादेश आ गया है। मुंबई के इस समाचार पर विचार करना व्यावहारिक होगा। राज्य में मराठी का प्रयोग सचिवालय के उच्चत्तम स्तर के अधिकारी करने वाले नहीं हैं। सरकार वे ही चलाते हैं। राज्य में जो क़ानून बनाए जाएंगे,वे सभी व मूल रूप से अंग्रेज़ी में तैयार होंगे। शासन-प्रशासन में कामकाज करने के लिए जो कार्यवाही काग़ज़ पर(नोटशीट) पर प्राथमिक स्तर पर
की जाती है,वह भी अंग्रेज़ी में ही जारी रहेगी। जब तक उपरोक्त स्तर पर मराठी भाषा का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा,तब तक बात बनने वाली नहीं हैं। राज्य सरकार का पत्र-व्यवहार केन्द्र सरकार से राज्य की भाषा मराठी में करना सबसे पहली आवश्यकता है,तथा केन्द्र सरकार से राज्य सरकार को जो पत्र-परिपत्र प्रेषित होंगे,वे भी मराठी भाषा में ही होना चाहिए। तब सच्चे अर्थों में महाराष्ट्र में मराठी को अपना संवैधानिक अधिकार मिलेगा।
ऐसा ही देश के अन्य सभी राज्यों को केन्द्र सरकार के साथ अपने राज्य की भाषा(हिंदी और अन्य)को वास्तविक सम्मान दिलाने के लिए पहल करना होगी। राज्य के उच्च न्यायालयों में भी राज्य की भाषा में कार्यवाही करने के लिए बिना विलंब क़दम उठाना होगा। सभी प्रकार की सेवाओं के लिए चयन भी राज्य की भाषाओं में करने के लिए क़दम उठाना होगा। यह सुझाव महाराष्ट्र सरकार के मुख्यमंत्री तक पहुंचाया जाना अत्यावश्यक है।

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