राधा रानी जन्म

संध्या चतुर्वेदी ‘काव्य संध्या’
अहमदाबाद(गुजरात) 
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भाद्र मास शुक्ल पक्ष अष्टमी को,
प्रकट भयी राधे रानी सुकमार।
देवलोक से आ रहे,
सभी देवता दर्शन को आज।
धन्य-धन्य हो रही ब्रज भूमि,
जहाँ रावल में जन्म लियो।
जिस-जिसने दर्शन किए,
हुए पूर्ण सब काज।
धन्य-धन्य माँ कीर्ति,
धन्य-धन्य विर्षभानु नन्द।
जिनके घर में जन्म लियो है,
तीन लोक की देवी ने आज।
बाज रही नौवत और शहनाई है,
झूम रहे सब बाल-ग्वाल।
देख विडम्बना कैसी है,
कंस के अत्याचार सो
पठाय दियो ननसार।
बड़ी हुई जहाँ नानी के,
घर में ही मिला मात का प्यार।
आज है मंगल घड़ी जो,
राधे रानी प्रकट भयी।
करे ‘संध्या’ अभिवंदन,
कर जोर करे प्रणाम।
माँ राधे दया करो,
सफल करो मम काम॥

परिचय : संध्या चतुर्वेदी का साहित्यिक नाम काव्य संध्या है। आपने बी.ए. की पढ़ाई की है। कार्यक्षेत्र में व्यवसाय (बीमा सलाहकार)करती हैं। २४ अगस्त १९८० को मथुरा में जन्मीं संध्या चतुर्वेदी का स्थाई निवास मथुरा(उत्तर प्रदेश)में है। फिलहाल अहमदाबादस्थित बोपल (गुजरात)में बसी हुई हैं। कई अखबारों में आपकी रचनाओं का प्रकाशन हो चुका है। लेखन ही आपका शौक है। लेखन विधा-कविता, ग़ज़ल, मुक्तक, दोहा, धनाक्षरी, कह मुकरिया,तांका,लघु कथा और पसंदीदा विषय पर स्वतंत्र लेखन है। संध्या जी की लेखनी का उद्देश्य समाज के लिए जागरुक भूमिका निभाना है। आपको लेखन के लिए कुछ सम्मान भी मिल चुके हैं

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