राष्ट्र निर्माता और वेतन ?

इंदु भूषण बाली ‘परवाज़ मनावरी’
ज्यौड़ियां(जम्मू कश्मीर)

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वह बता रहे थे कि कल वह सरकार के विरुद्ध विरोध-प्रदर्शन कर रहे थे। उनकी मांग थी कि उन्हें पिछले 4 माह से वेतन नहीं मिला,जिसके कारण उन्हें आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है,जबकि विधायकों को वेतन समय पर मिलता है।
वह निस्संकोच यह भी बता रहे थे कि शिक्षक के रूप में उन्होंने अपनी सेवा ३७ वर्ष सरकार को देनी है,परंतु उन्हें बुढ़ापे में पेंशन नहीं मिलनी,जबकि विधायकों व सांसदों को अल्पकाल सत्ता सुख भोगने पर भी लागू हो जाती है। यूँ भी सांसदों के कार्यकाल की अधिक से अधिक सीमा ५ वर्ष ही होती है।
चूंकि वह विधानसभा व संसद में बैठते हैं और हर तरफ अपने पद का दुरूपयोग कर लाभ ले लेते हैं। हम शिक्षक अपना पूरा जीवन ‘राष्ट्रनिर्माण’ पर लगा देते हैं ?
शिक्षक मंथन कर रहे थे कि क्या वास्तविक ‘राष्ट्र निर्माणकर्ताओं’ का जीवन व भविष्य अंधकारमय ही रहेगा ?

परिचय-इंदु भूषण बाली का साहित्यिक उपनाम `परवाज़ मनावरी`हैl इनकी जन्म तारीख २० सितम्बर १९६२ एवं जन्म स्थान-मनावर(वर्तमान पाकिस्तान में)हैl वर्तमान और स्थाई निवास तहसील ज्यौड़ियां,जिला-जम्मू(जम्मू कश्मीर)हैl राज्य जम्मू-कश्मीर के श्री बाली की शिक्षा-पी.यू.सी. और शिरोमणि हैl कार्यक्षेत्र में विभिन्न चुनौतियों से लड़ना व आलोचना है,हालाँकि एसएसबी विभाग से सेवानिवृत्त हैंl सामाजिक गतिविधि के अंतर्गत आप पत्रकार,समाजसेवक, लेखक एवं भारत के राष्ट्रपति पद के पूर्व प्रत्याशी रहे हैंl आपकी लेखन विधा-लघुकथा,ग़ज़ल,लेख,व्यंग्य और आलोचना इत्यादि हैl प्रकाशन में आपके खाते में ७ पुस्तकें(व्हेयर इज कांस्टिट्यूशन ? लॉ एन्ड जस्टिस ?(अंग्रेजी),कड़वे सच,मुझे न्याय दो(हिंदी) तथा डोगरी में फिट्’टे मुँह तुंदा आदि)हैंl कई अख़बारों में आपकी रचनाएं प्रकाशित हैंl लेखन के लिए कुछ सम्मान भी प्राप्त कर चुके हैंl अपने जीवन में विशेष उपलब्धि-अनंत मानने वाले परवाज़ मनावरी की लेखनी का उद्देश्य-भ्रष्टाचार से मुक्ति हैl प्रेरणा पुंज-राष्ट्रभक्ति है तो विशेषज्ञता-संविधानिक संघर्ष एवं राष्ट्रप्रेम में जीवन समर्पित है।

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