राही चांद-सितारों के

सुरेश जजावरा ‘सुरेश सरल’
छिंदवाड़ा(मध्यप्रदेश)
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चलना जरा संभल के,
तू चलना जरा संभल के।
ओ राही चांद-सितारों के,
तू चलना जरा संभल के॥

तेरे पथ में आ जाएंगे
फूल कहीं और कहीं पर काँटे,
सुंदर गिरीवर और नदिया
तेरा ध्यान बांटे,
अपनी धुन में चलते जाना-
आना ना तू पलट के।
ओ राही चांद-सितारों के,
तू चलना जरा संभल के…॥

दु:ख भी तुझको रोकेंगे
और सुख तुझको बहलाए,
गहरी खाई ये जीवन की
तुझको ना ले डुबाए,
ना तू ज्यादा हँसना और-
ना भिगोना पलकें।
ओ राही चांद-सितारों के,
तू चलना जरा संभल के…॥

मंजिल दुल्हन राह देखती
बाराती राह बुहारे,
जा वर ले तू उसको खुद से
लेजा संग तिहरे,
गर्व ना करना भूलना ना
दिन बीते हुए समय के।
ओ राही चांद-सितारों के,
तू चलना जरा संभल के…॥

कुछ ॠण बाकी तेरे उपर
उसको तुझे चुकाना,
मात-पिता गुरू से पहले,
देश का कर्ज चुकाना
बाद में फिर चुकते कर देना-
कर्जे सभी सकल के।
ओ राही चांद-सितारों के,
तू चलना जरा संभल के…॥

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2 Comments

  1. AADARNIY KAV SURESH JI, NAHUT SUNDARRACHAN HAI AAPKI. YADI SAMBHAV HO TO MUJHASE SAMPARK KAREN YA APNO SAMPARK NAMBAR PRADAN KARE.
    APKA APNA , KAVI SATISH VISHWAKARMA “ANAND” CHHINDWRA 8982108459

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