रिश्ते

केवरा यदु ‘मीरा’ 
राजिम(छत्तीसगढ़)
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रिश्तों को मैं रखती हूँ आँचल में बाँध कर।
रिश्ते बचाए मैंने समंदर को लाँघ कर॥

माता मेरी गुरू थी भगवान भी मेरे,
संस्कार जिससे पाए वह संस्कार थी मेरे।
माता-पिता को पूजा है मैंने भगवान मानकर॥
रिश्ते बचाए मैंने समंदर…

बेटी है गर हीरा तो बेटा भी है मोती,
बेटी जिगर का टुकड़ा,बेटा आँख की ज्योति।
शिक्षा दिलाई दोनों को समान मानकर।
रिश्ते बचाए मैंने समंदर…॥

पुत्र वधुएँ हैं बेटियों से कम नहीं मेरी,
सहेलियों-सी हँसती-फिरती हैं संग-संग मेरे।
छू रही है आसमां को हर दस्तूर लाँघ कर॥
रिश्ते बचाए मैंने समंदर…॥

रिश्ता है सौ जनम का सजना के साथ में,
फेरे लिए हैं खायी कसम ले हाथों को हाथ में।
सिंदूर चमकता रहे बस मेरी मांग में,
रिश्ते  बचाए मैंने समंदर…॥

गुरुवर चरण में नित्य ही मैं शीश झुकाती,
मीरा हूँ श्याम की मैं गीत उनके ही गाती।
जन्मों से रिश्ता श्याम से जोड़े मीत मानकर,
रिश्ते बचाए मैंने समंदर…॥

रिश्ता मेरा भूखे गरीबों के साथ भी,
पोंछने को आँसू मैं हर पल तलाशती।
उनसे है मेरा नाता मानवता के नाम पर,
रिश्ते  बचाए मैंने समंदर…॥

रिश्ता है मेरा भानु शशि चमकते सितारों से,
रिश्ता पर्वत सागर से फूल और  खारों से।
रिश्ता है उन बेटियों से जो सताई गई रस्मों  के नाम पर,

रिश्ते बचाए मैंने समंदर को लाँघकर,
रिश्तों को मैं हूँ लाई  हूँ आँचल में बाँधकर।
रिश्ते बचाए मैंने समंदर…॥

परिचय-केवरा यदु का साहित्यिक उपनाम ‘मीरा’ है। इनकी जन्म तारीख २५ अगस्त १९५४ तथा जन्म स्थान-ग्राम पोखरा(राजिम)है। आपका स्थाई और वर्तमान बसेरा राजिम(राज्य-छत्तीसगढ़) में ही है। स्थानीय स्तर पर विद्यालय के अभाव में आपने बहुत कम शिक्षा हासिल की है। कार्यक्षेत्र में खुद का व्यवसाय है। सामाजिक गतिविधि के तहत महिलाओं को हिंसा से बचाना एवं गरीबों की मदद करना प्रमुख कार्य है। भ्रूण हत्या की रोकथाम के लिए ‘मितानिन’ कार्यक्रम से जुड़ी हैं। आपकी लेखन विधा-गीत,ग़ज़ल सहित भजन है। १९९७ में श्री राजीवलोचन भजनांजली,  २०१५ में काव्य संग्रह-‘सुन ले जिया के मोर बात’,२०१६ में देवी भजन (छत्तीसगढ़ी में)सहित २०१७ में सत्ती  चालीसा का भी प्रकाशन हो चुका है। लेखनी के वास्ते आपने सूरज कुंवर देवी सम्मान,राजिम कुंभ में सम्मान,त्रिवेणी संगम साहित्य सम्मान सहित भ्रूण हत्या बचाव पर सम्मान एवं हाइकु विधा पर भी सम्मान प्राप्त किया है। केवरा यदु के लेखन का उद्देश्य-नारियों में जागरूकता लाना और बेटियों को प्रोत्साहित करना है। इनके जीवन में प्रेरणा पुंज आचार्यश्रीराम शर्मा (शांतिकुंज,हरिद्वार) व जीवनसाथी हुबलाल यदु हैं। 

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