रेस्तराँ 

रुपा कुमारी
हावड़ा(पश्चिम बंगाल)
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भाग-४……………………….
उसी दिन दो महीने पूरे हो जाते हैं,और शाम को जिया के साथ क्रीत भी रेस्तराँ में हाजिर रहता है।
जैन जल्दी से पहुंचकर जिया की टेबल पर गुलदस्ता रख देता है,इतने में जिया,  जैन की पहचान क्रीत से करवाती है।
जिया-‘जैन,इनसे मिलो ये मेरे पति क्रीत सिंग है।’
जैन को अपने कानों पर विश्वास नहीं होता है। फिर दोनों एक-दूसरे को हैलो करते हैं। फिर जिया गुलदस्ता लाने  का कारण पूछती है। तब जैन बहाना बनाकर कहता है-‘कल तुम्हारा जन्मदिन था न,और मैंने कुछ दिया नहीं,इसलिए।’
जैन अंगूठी निकालकर भेंट करता है,पर जिया उसे लेने से मना करती है। आखिकार जैन के बार-बार कहने से वह अंगूठी रख लेती है।
जैन दोनों से कहता है-दादा जी घर पर अकेले हैं,और आज उन्होंने जल्दी बुलाया है,मुझे जाना पड़ेगा।’
क्रीत-कोई बात नहीं,हम लोग कभी और मिल लेगें।’
फिर जैन दोनों को अलविदा कहकर वहाँ से निकल जाता है,पर घर नहीं जाता है। वह शालीमार बार में चला जाता है। उसने कभी शराब नहीं पी थी,पर आज वह जिंदगी में पहली बार शराब पीता है।
इतने में दोस्त शैम का फोन आता है,और पूछता है कि जिया ने क्या कहा ?
जैन रोने लगता है..जैन की रोने की आवाज सुनकर शैम जल्दी से शालीमार बार पहुंचता है,और पूछताछ करता है। तब जैन शैम को सारी बात बता देता है। शैम उससे पूछता है-‘अब तुम क्या करोगे ?’
जैन-‘जिया को नहीं बताऊँगा।’
शैम-‘क्यों ?’
जैन-‘मैं उसकी जिंदगी बर्बाद नहीं करना चाहता हूं। वह अपने पति के साथ बहुत खुश है।’
शैम-‘और तुम!’
जैन-‘मैं उसी की खुशी में खुश रह लूँगा, और वैसे भी सच्चा प्यार वह होता है जो अपने प्यार को खुश देखने के लिए  हर चीज छोड़ दे। वैसे भी जिया की खुशी क्रीत में है, मुझमें नहीं।’
जैन और शैम वहाँ से घर चले जाते हैं।
इधर क्रीत और जिया भी घर चले जाते हैं। क्रीत,जिया से पूछता है-‘उसने तुम्हें हीरे की अंगूठी क्यों दी ?’
जिया-‘कल मेरा जन्मदिन था न, इसलिए।’
क्रीत-‘पता है,पर हीरे की अंगूठी!’
जिया-‘अरे बाबा,स्टार मल्टीनेशनल कम्पनी का मालिक है,वह छोटी-मोटी चीज थोड़ी देगा।’
इतना कहकर जिया सो जाती है,पर क्रीत को जिया और जैन के रिश्ते पर सन्देह होता है।
जैन,जिया से मिलने रेस्तराँ में नहीं जाता है,तो जिया भी रेस्तराँ (रेस्टोरेंट)आना कम कर देती है। क्रीत और जिया  घर पर ही खाना बना लेते हैं। उधर जैन शराब पीने में मगन हो जाता है। जैन, जिया को भुलाने के लिए नशीली चीजों का सेवन करने लगता है।
एक शाम को जिया से खाना जल जाता है,तो क्रीत उसे बहुत खरी-खोटी सुनाता है।  जिया रोने लगती है,और रोते-रोते सो जाती है। धीरे-धीरे दोनों में छोटी-छोटी बातों पर झगड़ा होने लगता है,और अंत में जिया ही माफी मांगती है,जबकि उसकी गलती नहीं रहती है तो भी।
जिया बीच-बीच में जैन को फोन करती रहती है,पर वह फोन नहीं उठाता है…।

(प्रतीक्षा कीजिए अगले भाग की…)

परिचय-रुपा कुमारी का बसेरा पश्चिम बंगाल के हावड़ा स्थित पहचानतला मार्ग पर है। आपकी जन्मतिथि २९ अप्रैल २००२ एवं जन्म स्थान बिहार है। स्थाई पता भी पहचानतला मार्ग ही है। रुपा कुमारी फिलहाल वाणिज्य विषय से कक्षा १२ वीं में अध्ययनरत हैं। इनकी लेखन विधा-कविता है। कार्यक्षेत्र में विद्यार्थी हैं। इनकी लेखनी का उद्देश्य अपनी भावनाओं की अभिव्यक्ति से सामाजिक चेतना को जागृत करते रहना है।

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