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रुपा कुमारी
हावड़ा(पश्चिम बंगाल)
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भाग-५……………………………
एक दिन जिया शैम से मिलती है,तब उससे पूछती है कि जैन कहाँ है और आजकल वह उसका फोन नहीं उठाता है।
तब शैम बहाना करता हुआ कहता है-‘ अरे तुम्हें पता नहीं है क्या! वह विदेश गया हुया है। और आजकल तो वह मेरा फोन भी नहीं उठाता है। वह बहुत व्यस्त है अपने काम में।’
जिया घर चली जाती है। फिर शैम,जैन के घर जाता है और उससे इस बारे में पूछता है। जैन कहता है-‘जिया की आवाज सुनते ही अजीब-सी बेचैनी होती है। उसकी याद आते ही मुझे रोना आता है।’
इतने में जैन खून की उल्टी कर देता है,शैम उसे तुरन्त अस्पताल ले जाता है। जैन की हालत बहुत खराब है और उसे होश नहीं आता है।
इधर क्रीत और जिया का झगड़ा बढ़ता जाता है। क्रीत अब घर भी देरी से आता है। एक दिन जिया को पता चलता है कि,क्रीत का चक्कर चल रहा है,किसी आराध्या नाम की लड़की के साथ।
वह क्रीत से इस बारे में पूछती है,तब क्रीत गुस्से में कहता है-‘जिया मैं तुमसे तंग आ गया हूँ,तुम्हें कुछ नहीं आता है। तुम किसी काम की नहीं हो। तुमसे अच्छी तो आराध्या है,किसी काम की तो है।’
जिया रोने लगती है,जिया और क्रीत के बीच अब बातचीत कम औऱ मन-मुटाव ज्यादा होने लगता है। जिया का रो-रोकर बुरा हाल हो जाता है। जिया पहले से बहुत कमजोर और दुबली हो जाती है। २० वर्षीय युवती अब ३०-३५ वर्ष की महिला लगती है।
उधर जैन को ८ दिन के बाद होश आता है। चिकित्सक ने शैम और उसके दादाजी को बताया कि नशीली चीजों और शराब का सेवन करने से उसका लीवर खराब हो गया है और जैन के पास बहुत कम दिन बचे हैं। इन कम दिनों में उसका इलाज कर पाना असंभव है।
जैन,शैम को बुलाता है और कहता है-‘भाई मेरा एक काम करोगे ?’
शैम-‘क्या?’
जैन-‘वकील को बुला दोगे जरा!’
शैम,वकील को बुलाने चला जाता है।
इधर क्रीत,जिया से तलाक माँगता है पर जिया तलाक देने से मना करती है।
एक दिन सुबह-सुबह क्रीत जिया के बालों पर हाथ फेरता हुआ कहता है-‘सच्चा प्यार क्या होता है ?’
जिया रोते हुए-‘सच्चा प्यार वह है,जिसमें एक प्रेमी,अपने प्रेमी के लिए सब-कुछ छोड़ दे। सच्चे प्रेमी को देखते ही दुनिया भूल जाए।’
क्रीत-‘तुमने कहा सब-कुछ छोड़ दे न,अगर तुम मुझे चाहती हो तो तुम मुझे तलाक जरूर दोगी।’

(प्रतीक्षा कीजिए अगले भाग की…)
परिचय-रुपा कुमारी का बसेरा पश्चिम बंगाल के हावड़ा स्थित पहचानतला मार्ग पर है। आपकी जन्मतिथि २९ अप्रैल २००२ एवं जन्म स्थान बिहार है। स्थाई पता भी पहचानतला मार्ग ही है। रुपा कुमारी फिलहाल वाणिज्य विषय से कक्षा १२ वीं में अध्ययनरत हैं। इनकी लेखन विधा-कविता है। कार्यक्षेत्र में विद्यार्थी हैं। इनकी लेखनी का उद्देश्य अपनी भावनाओं की अभिव्यक्ति से सामाजिक चेतना को जागृत करते रहना है। 

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