रोटी

केवरा यदु ‘मीरा’ 
राजिम(छत्तीसगढ़)
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नींद चैन की आये खाकर रोटी,
ज्वाला पेट की मिट जाये पाकर रोटी।

रोटी पतली हो या मोटी,
रोटी तो होती है रोटी।
चाहे वह घी से चुपड़ी हो,
हो चाहे वह सूखी रोटी।
भूखे को भगवान मिल
जाये पाकर रोटी।
ज्वाला पेट की मिट
जाये पाकर रोटी।

ईमान बेचकर खाता,
है कोई दो रोटी।
भगवान बेचकर खाता,
कोई दो रोटी।
इन्सान बेचकर भी,
खाता है कोई रोटी।
अरमान बेचकर खाता,
है कोई दो रोटी।
चोरी करके न पछताए,
पाकर रोटी।
बच्चे भी सो जाये,
पाकर रोटी।
ज्वाला पेट की मिट
जाये पाकर रोटी।

बिलख-बिलख कर,
पाये कोई दो रोटी।
भीख मांग कर,
लाये कोई दो रोटी।
भूखे को क्या-क्या,
दिन दिखलाये ये दो रोटी।
ज्वाला पेट की मिट
जाये पाकर रोटी।

हल चला-चलाकर,
पाये कृषक दो रोटी।
ईंट को ढो-ढोकर,
पाये कोई दो रोटीl
गरीबी में त्योहार हो जाये,
पाकर दो रोटी।
ज्वाला पेट की मिट
जाये पाकर रोटी।

जीने के लिये खाता,
यहाँ कोई रोटी।
खाने के लिये भी,
जीता है कोई रोटी।
ऐसे भी हैं जिन्हें,
नहीं मिल पाती रोटीl
भगवान कृपा कर देना,
सबको बराबर रोटी।

नींद चैन की आये,
खाकर रोटी।
ज्वाला पेट की मिट
जाये पाकर रोटीll 

परिचय-केवरा यदु का साहित्यिक उपनाम ‘मीरा’ है। इनकी जन्म तारीख २५ अगस्त १९५४ तथा जन्म स्थान-ग्राम पोखरा(राजिम)है। आपका स्थाई और वर्तमान बसेरा राजिम(राज्य-छत्तीसगढ़) में ही है। स्थानीय स्तर पर विद्यालय के अभाव में आपने बहुत कम शिक्षा हासिल की है। कार्यक्षेत्र में खुद का व्यवसाय है। सामाजिक गतिविधि के तहत महिलाओं को हिंसा से बचाना एवं गरीबों की मदद करना प्रमुख कार्य है। भ्रूण हत्या की रोकथाम के लिए ‘मितानिन’ कार्यक्रम से जुड़ी हैं। आपकी लेखन विधा-गीत,ग़ज़ल सहित भजन है। १९९७ में श्री राजीवलोचन भजनांजली,  २०१५ में काव्य संग्रह-‘सुन ले जिया के मोर बात’,२०१६ में देवी भजन (छत्तीसगढ़ी में)सहित २०१७ में सत्ती  चालीसा का भी प्रकाशन हो चुका है। लेखनी के वास्ते आपने सूरज कुंवर देवी सम्मान,राजिम कुंभ में सम्मान,त्रिवेणी संगम साहित्य सम्मान सहित भ्रूण हत्या बचाव पर सम्मान एवं हाइकु विधा पर भी सम्मान प्राप्त किया है। केवरा यदु के लेखन का उद्देश्य-नारियों में जागरूकता लाना और बेटियों को प्रोत्साहित करना है। इनके जीवन में प्रेरणा पुंज आचार्यश्रीराम शर्मा (शांतिकुंज,हरिद्वार) व जीवनसाथी हुबलाल यदु हैं। 

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