रोशनी का वार

वन्दना शर्मा
अजमेर (राजस्थान)

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अंधेरे की भयानकता खूब देखी है साहिब,
मगर रोशनी भी कम भयावह नहीं होती
चमक और धवल की अधिकता पल में गिरा देती है,
बरसों की कमाई सरलता को कलूटी कुटिला बना देती हैl
आँखें चौंधिया जाती हैं,हादसा ऐसा होता है,
कभी ना उठ सकने जैसा अपाहिज बना जाती है
अंधेरे से भी घातक है ये रोशनी,
मिटाकर जमीं पर औंधे मुंह गिरा जाती हैl
बचना इससे ये वो चौकी है,
जो खुद को अकाट्य बता जाती हैll
(इक दृष्टि इधर भी:चौकी-टोना टोटका)

परिचय-वंदना शर्मा की जन्म तारीख १ मई १९८६ और जन्म स्थान-गंडाला(बहरोड़,अलवर)हैl वर्तमान में आप पाली में रहती हैंl स्थाई पता-अजमेर का हैl राजस्थान के अजमेर से सम्बन्ध रखने वाली वंदना शर्मा की शिक्षा-हिंदी में स्नातकोत्तर और बी.एड. हैl आपका कार्यक्षेत्र-नौकरी के लिए प्रयासरत होना हैl लेखन विधा-मुक्त छंद कविता हैl इनकी लेखनी का उद्देश्य- स्वान्तःसुखाय तथा लोकहित हैl जीवन में प्रेरणा पुंज-गुरुजी हैंl वंदना जी की रुचि-लेखन एवं अध्यापन में है|

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