लटकता लोकतंत्र और खरीद-फरोख्त

प्रो.स्वप्निल व्यास
इंदौर(मध्यप्रदेश)
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देश के संविधान ने हमारी जनता को मताधिकार देकर देश का वास्तविक शासक बनाया है,पर यह ध्यान देना होगा कि राजा का निर्णय राज्य का भविष्य तय करता है।इसलिए मत हमेशा गंभीरता और सूझ-बूझ से देना चाहिए। माना कि चुनाव लड़ना सभी का अधिकार है,पर मत देना हमारा। आज बात कर्नाटक राज्य के संदर्भ में है। माना कि जनादेश शिरोधार्य करना चाहिए पर अगर जनादेश भविष्य में हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था को ही चरमरा दे तो विचार करने की जरूरत है। यहां सरकार बनाने के लिए भाजपा और बीएस येदियुरप्पा को आठ विधायकों की और जरूरत है,तथा आठ का आंकड़ा पार करने पर ही विधानसभा में उनका बहुमत साबित होगा। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें शपथ लेने की अनुमति तो दे दी लेकिन अभी ११२ के जादुई अंक पर गहन मंथन और फैसला होना बाकी है।
अब सवाल यह है कि यह नौटंकी कब ख़त्म होगी,क्योंकि अगर सरकार की नींव ही खरीद-फरोख्त और नैतिक मूल्यों को ताक पर रखकर खड़ी की गई हो तो एक कल्याणकारी राज्य-एक ईमानदार राज्य की कल्पना धोखा है। इस पर दलों को तथा मतदाताओं को भी सोचना होगा।
परिचय-प्रो.स्वप्निल व्यास का निवास इंदौर में ही है। आपकी जन्मतिथि ३ जुलाई १९८४ तथा जन्म स्थान-इंदौर है।  मध्यप्रदेश राज्य के इंदौर वासी प्रो.स्वप्निल व्यास ने वाणिज्य में स्नातक पश्चात पत्रकारिता में भी स्नातक-स्नातकोत्तर उपाधि हासिल करने के साथ ही पीजीडीबीए,एमबीए,समाज कार्य विषय में एवं लोक प्रशासन में स्नातकोत्तर कर लिया है। आपका कार्य एक निजी महाविद्यालय में सहायक प्राध्यापक का है। सामाजिक गतिविधि-के अंतर्गत सामुदायिक परामर्शदाता का कार्य भी करते हैं। आपकी लेखन विधा-लेख और कविता है,जबकि प्रेरणा पुंज-माता-पिता हैं। स्वप्निल जी के लेखन का उद्देश्य-जागृति,संवाद के लिए स्वतन्त्र लेखन करते रहना है।

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