लहर लोकतंत्र की

जीवनदान चारण ‘अबोध’  
पोकरण(राजस्थान) 
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विश्व को विश्वास दिलवाने की ताकत केवल जनमत में ही है,इसलिए भारत में वर्तमान हालात वहीं से गुजर रहे हैंl सभी की नजरें ७ दिसंबर पर है,क्योंकि राजस्थान राज्य में विधानसभा चुनाव में उल्लास के साथ इस पर्व को मनाने की चोतरफा चौपालें जमी हुई हैंl इस चुनाव से किसान उम्मीदें बांधे नये सपने देख रहा है,युवा रोजगार,गरीब आशियाना ओर दो वक्त का गुजारा, विज्ञान की नयी तरक्की के साथ लोकतंत्र से अपना हक मांग रहा है, लेकिन लोकतंत्र की चिर सुहागिन सत्ता हर पांच साल बाद अपना पति बदलती है। हर पांच साल बाद हर राज्य का श्रृंगार उजड़ता है और हर पांच साल बाद छातीकूटे के कोहराम के बीच स्वयंवर आहूत होता है। सभी
विधायिका नामक अनिध्य सुंदरी को पाने सज-धज कर पहुंचते हैं,एवं
मवाली,मुनाफाखोर और भूमाफिया तो दूसरी ओर राष्ट्रवादी,देशभक्त,प्रजा हितैषी ताकड़ियों पर टके के भाव से इंसानी मोल करते हैं।
प्रजातंत्र की जच्चा को पांच साल बाद ही जापा होता है और हर पांच साल बाद ही विकास नामक सपूत की थाली बजती है। अब तो यह हालात हैं कि बेबाक शंखों के विजयी जुलूस में
दिव्यांग जनतंत्र को भी मेरा लोक तंत्र नचा देता है।
राज्य और देश के इन चुनावों में सम्पूर्ण भारत एकटक लगाए अपने विकास के सपने देखता है,फिर भी
झगड़े,द्वेष तथा गुटबाजी ज़ारी रहती है। इसके बावजूद हर गाँव-हर आदमी
नेह-समर्पण के साथ इसे भुलाकर यही लोकतंत्र में अपनी आहुति डालता है, और यही आहुति राजस्थान में ७ दिसम्बर को मतदाता द्वारा डाली जाएगी। इस भावना के साथ मिल-जुलकर रहना आज भी भारतीय समाज की परम्परा है,जिसे यह लोक तंत्र ओर भी मजबूत करता है।
इसलिए,हर पांच साल बाद
डबडबायी आँखो से राज्य और राष्ट्र भाग्यविधाताओं का ‘गान’
…जय जय जय जय हे! मेरा भारत महान….दोहराता है। जो भी हो, जैसी भी हालत हो,पर सकारात्मक परिस्थितियों के आगमन के लिए मतदान अवश्य कीजिए,तभी लोकतंत्र मज़बूत होगा।

परिचय-जीवनदान चारण का बसेरा  पोकरण(राजस्थान) में है। ‘अबोध’  आपका साहित्यिक उपनाम है। इनकी जन्म तारीख १३ जुलाई १९९४ एवं जन्म स्थान गांव पोस्ट आरंग है। श्री चारण का स्थाई पता आरंग(जिला बाड़मेर)है। परम्पराओं के लिए प्रसिद्ध राज्य राजस्थान के अबोध ने बी.एड. सहित बी.ए. और एम.ए. की पढ़ाई की है। आपका कार्यक्षेत्र अध्यापक (विद्यालय-पोकरण) का है। सामाजिक गतिविधि के अन्तर्गत आप समाज सुधार,प्रचलित कुप्रथाओं को दूर करने के लिए अपने विचारों से सतत सक्रिय रहते हैं। लेखन विधा-दोहे,श्लोक,ग़ज़ल, कविता(विशेष-संस्कृत में गीत,श्लोक, सुभाषित, लेख भी।) है। प्रकाशन में  ‘कलम और कटार’ (किताब)आपके नाम है तो रचनाओं का प्रकाशन पत्र-पत्रिका में भी हो चुका है। आपकी विशेष उपलब्धि-संस्कृत साहित्य में लेखन करना है। इनकी लेखनी का उद्देश्य-ईश्वर उपासना,देवी गुणगान और देशभक्ति है।  आपके लिए प्रेरणा पुंज स्वामी विवेकानंद जी हैं।

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