लो चलें शाला…

राजेश पुरोहित
झालावाड़(राजस्थान)
*******************************************************
    परीक्षाएं समाप्त होते ही लो अब परिणाम भी आ गया। अब कावेरी को बच्चों की शाला की चिंता सताने लगी। कहाँ रखे बच्चों को पढ़ने के लिए। घर से सभी निजी शाला काफी दूर है। पास में ही एक सरकारी शाला है। इस स्कूल में कक्षा एक से बारह तक के बच्चे पढ़ते हैं।
   कावेरी सरकारी विद्यालय में अपने नौनिहलों को दाखिला कराने की मन ही मन सोचने लगी। कावेरी के पति का देहांत हुए दो वर्ष हो गए थे। उसके एक लड़का राहुल व लड़की गीता थे।
   वह पति की मौत के बाद उनका सारा खर्च खाने-पीने,कपड़े,शाला की किताबें,उत्तरपुस्तिकाएं लाना आदि काम मेहनत-मजदूरी कर चलाती थी। अब उससे ज्यादा काम नहीं होता। उसको सांस की बीमारी भी हो गई थी।
   मुहल्ले के सभी लड़के-लड़कियां निजी शाला में ही पढ़ने जाते हैं। कावेरी ने दोनों बच्चों से डरते-डरते पूछा। बच्चों हम तुम्हें अब पास ही के सरकारी विद्यालय में भर्ती कराने ले चलेंगे। क्या तुम तैयार हो ? बच्चे त्योरियां चढ़ाकर बोले सरकारी.. ! नहीं माँ,हम घर पर ही रह लेंगे पर सरकारी शाला में नहीं जाएंगे।
कावेरी बोली-बेटे कमाई कौन करेगा ? तुम्हारे बापू तो नहीं है,और मुझसे अब ज्यादा काम नहीं होता। समझ गए न। अब अच्छे बच्चों की तरह सुबह तैयार हो जाना। सुबह सरकारी शाला चलेंगे। बच्चे बोले-नहीं माँ,पड़ोस के सब बच्चे निजी में जाते हैं। वो सब हमारी हिंदी करेंगे। हमें चिढ़ाएंगे। कावेरी बोली-नहीं नहीं तुम्हें कोई नहीं चिढ़ाएगा।
  अगले दिन कावेरी दोनों को लेकर सरकारी शाला  गई। गुरुजी ने उसे पूरा विद्यालय बताया। ये कम्प्यूटर कक्ष है,यह पुस्तकालय है। ये रसोईघर है,ये बगीचा है। ये खेल मैदान है,ये बच्चों के भोजन करने का कक्ष है,ये ठंडा पानी,शुद्ध पेयजल के नल लगे हैं,ये प्रतिदिन का मीनू है,यहां रोज अलग अलग भोजन दिया जाता है। फिर गुरुजी ने कावेरी को समझाया कि हमारे सरकारी विद्यालय में निःशुल्क साइकिल मिलती है। छात्रवृति मिलती है। रोज बच्चे प्रार्थना में योग,प्राणायाम का अभ्यास करते हैं। बड़ी रोचक गतिविधियां होती है यहां। विषय विशेषज्ञों द्वारा बच्चों को सभी विषयों में पारंगत किया जाता है।
    कावेरी तुम्हें दोनों के लिए कुछ नहीं खरीदना है। गरीब बच्चों की सहायता के लिए भामाशाहों से निशुल्क गणवेश,जूते मोजों की व्यवस्था करवा दी जाती है। किताबें निशुल्क मिलती है। दानदाताओं से उत्तर पुस्तिकाएं आदि भी इन्हें मिल जाएगी।
   गुरुजी बोले-अब सरकारी की पढ़ाई निजी शालाओं से अच्छी होने लगीं है। तुम हर सप्ताह यहां आकर बच्चों की पढ़ाई,स्वास्थ्य के बारे में पूछना। यहां वजन,लंबाई आदि के साथ ही गंभीर रोगों की जांच व इलाज भी मुफ्त किया जाता है। सरकारी चिकित्सकों का दल स्वास्थ्य परीक्षण करता है। बिल्कुल चिंता न करें।
यहाँ बालक का सर्वांगीण विकास होता है।
     गुरुजी बोले-अच्छे अंक से उत्तीर्ण होने पर सरकार टेबलेट-लेपटॉप देती है। लड़कियों को गार्गी पुरस्कार देती है। पालनहार योजना में रुपए सीधे खाते में जमा हो जाते हैं।
   कावेरी मन ही मन पछताई। और उसने दोनों बालक बालिकाओं को सरकारी शाला में भर्ती करा दिया।

Hits: 36

आपकी प्रतिक्रिया दें.