लौटकर मत आना

सुषमा मलिक 
रोहतक (हरियाणा)

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खत्म हुआ इंतजार मेरा अब तुम लौटकर मत आना,
मंजिल राह तके तुम्हारी तुम तो पथ पर बढ़ जानाl

राह मेरे बे-राह हुए और मंजिल भी मेरी रूठी मुझसे,
जिंदगी शुरू भी मेरी और खत्म भी है मेरी तुझसे।

हर कदम अब पूछ रहा कि क्या मिला है तुझे उससे,
ख्वाब भी थे `मलिक` के, सपने भी थे तेरे जिससेl

फैलाकर के बांहें अपनी अब तुम हर खुशी को पाना,
खत्म हुआ इंतजार मेरा अब तुम लौटकर मत आना।

कांटे ही कबूल मुझे अब नफरत हो गई है फूलों से,
स्थिर खड़ी हूं बस झूलना नहीं उन फरेबी झूलों से।

नासूर हुए वो घाव अब जो लगे तेरे उन त्रिशूलों से,
जिंदगी हुई कितनी कठिन `मलिक` की उन भूलों से।

अच्छा नहीं लगता `मलिक` अब किसी गैर को सताना,
खत्म हुआ इंतजार `सुषमा`,अब लौटकर मत आनाll

परिचय : रोहतक निवासी सुषमा मलिक की जन्मतिथि-२३ अक्टूबर १९८१ तथा जन्म स्थान-रोहतक (हरियाणा)है। आपका निवास रोहतक स्थित शास्त्री नगर में है। एम.सी.ए. तक शिक्षित सुषमा मलिक का कार्यक्षेत्र विद्यालय में प्रयोगशाला सहायक और एक संस्थान में लेखापाल का है। आप सामाजिक क्षेत्र में कम्प्यूटर प्रयोगशाला संघ की महिला प्रदेशाध्यक्ष हैं। लेखन विधा-कविता,लेख और ग़ज़ल है। विविध अखबारों और पत्रिकाओं में आपकी रचनाएं निरन्तर आती रहती हैं। उत्तर प्रदेश की प्रमुख साहित्यिक संस्था सहित अन्य संस्थाओं ने भी आपको सम्मानित किया है। आपकी दृष्टि से लेखन का उद्देश्य-अपनी आवाज से जनता को जागरूक करना है।

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