वर्तमान भारत में वर्ग संघर्ष का दौर

डॉ.अरविन्द जैन
भोपाल(मध्यप्रदेश)
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कमल कीचड़ में पैदा होता है और कीचड़ से अलग रहता है,यदि कीचड़ का स्तर कम होता है तब कमल का डंठल नीचे नहीं होता हैं,यदि हम किसी को अंगुली पकड़ाते हैं तब वह पौंचा पकड़ना चाहता हैंl वर्ग व्यवस्था हमारे यहाँ नहीं थी,वर्ण व्यवस्था भी शुरुआत में नहीं थीl पहले सब एक वर्ण के थेl जैसे-जैसे समय में परिवर्तन हुआ,तब उनके कर्मों के आधार पर वर्ण व्यवस्था की या हुईl जन्म के समय कोई विभेद नहीं होता,पर उस शिशु पर माँ-बाप के जन्मजात गुणों  के साथ उस शिशु के अपने पूर्व जन्म के गुणों का आना होता है,जिसे अनुवांशिक गुण कहते हैंl
आज हम स्वयं कहते हैं कि-मनुष्य जन्म से नहीं,कर्मों से महान बनता हैंl जी हां,आज जो वर्ण व्यवस्था है,जिसे हम ब्राहण,क्षत्रिय,वैश्य और शूद्र कहते हैंl शूद्र भी दो प्रकार के होते हैं-एक स्पर्शनीय और दूसरा अस्पर्शनीयl शूद्रों की वृत्तियों के कारण और उनमें गलत आदतों-जैसे खानपान में शुद्धता नहीं, शराब पीना,शिकार खेलना और आचरण में पवित्रता न होने के कारण गरीबी-अशिक्षा के शिकार हुएl ये गुण उन्हें
जन्मजात विरासत से मिलेl गरीबी बुराई हो सकती है,पर उससे अधिक मांस खाना,शराब पीना,नशा करना,चरित्र का कोई स्थान नहीं और अन्य काम जो निंदनीय होते हैं उनमें प्रचुरता से होते हैंl ऐसा नहीं कि,ये आदतें उनमें ही होती हों,सब वर्ण में हैं,पर उनमें कुछ लोक लाज होती हैl बुराईयां किसी जाति धरम-व्यक्ति की विरासत नहीं हैं,ये सबमें कूट-कूटकर भरी हैंl
आज उच्च जाति के अलावा अच्छे धर्म के लोग भी नीच प्रवृत्ति के काम कर रहे हैं,या करा रहे हैं यह युग का प्रभाव हैl देश की स्वतंत्रता में सब वर्गों ने बहुत बहादुरी से योगदान दिया,जिससे हम आज़ाद हुएl उसके बाद वर्ष १९५७ में भारत वर्ष में हरिजन आदिवासी भाइयों के संरक्षण के लिए १० वर्ष का समय दिया गया और उनके विकास पर जोर दिया गया,तथा निरंतर यह क्रम बढ़ता गयाl हर सिक्के के दो पहलू होते हैं,इसका उपयोग और दुरुपयोग होना शुरू हुआl इस कारण सामान्य वर्ग के लोगों के हक़ के ऊपर कुठाराघात होना शुरू हुआl यहाँ कोई शक नहीं कि,इन वर्गों में विकास बहुत हुआ और उन्होंने मुख्यधारा में जुड़कर अपना स्थान बनायाl इसके परिणाम स्वरूप राष्ट्रपति,उपराष्ट्रपति,लोकसभा अध्यक्ष,राज्यसभा अध्यक्ष और अनेक प्रदेशों के मुख्यमंत्री,सचिव-अधिकारी बने और सबने खूब स्वयं का और समाज का विकास कियाl यह क्रम ६० वर्ष से अधिक हो गयाl यानी एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक परिवर्तन हुआl यह क्रम अंतहीन नहीं होना चाहिए,पर आज सरकार `मत` के पीछे उनको अपना `मत बैंक` मानकर उनकी सब बातों को मानती है,और रहेगीl
यदि गत साठ वर्षों के इतिहास पर नज़र दौड़ाएं,तब हम देखते हैं कि,उनको दी गई सुविधाओं ने उनको बहुत अधिक शक्तिशाली और हिस्सेदार बनाया हैl  उनके द्वारा कोई भी अपराध होने पर सामान्य वर्ग को प्रताड़ित करने के सुअवसर मिले और उन्होंने बहुत सामान्य वर्ग के लोगों के भविष्य को अंधकारमय बनायाl बिना कारण मुकदमों की धमकी और उनकी महिलाओं ने भी अनाप-शनाप मुकदमे चलाएl इसके अलावा सरकारी नौकरी में निम्न अंकों के बावजूद अच्छी संस्थाओं में प्रवेश,फीस माफ़ी और अन्य सुविधाएं दी गईl इससे उच्च योग्य प्रतिभाओं को कुंठित होकर आत्महत्याएं तक करना पड़ी हैंl यहाँ तक कि,इनको पदोन्नति का लाभ अनुभवहीन होने पर मिला और किन्हीं-किन्हीं लोगों ने ईर्ष्यावश झूठे मुकदमों में फंसाया,और अदृश्य प्रताड़ना भी मिलीl जनता के लोगों के धन का दुरुपयोग इनके विकास में किया गया और उसके बाद उनके द्वारा अनेक लाभ लिए गएl यहाँ तक सब सहनीय रहाl
समय के अनुसार अनुभव के आधार पर कुछ नियमों में सुधार और संशोधन होने पर जो उग्र रूप से आंदोलन हो रहे हैं,उस दौरान आगजनी,सरकारी संपत्ति का नुकसान और मौतों से किसको क्या मिला ? क्या मिलेगा ?और कितना लाभ लेना होगा..? आज सामान्य वर्ग इनकी अयोग्यता के शिकार होकर कुंठाग्रस्त हो रहे हैं,जो अन्याय की श्रेणी में माना जाएl
यहाँ कुछ उपयोगी सुझाव हैं कि,अब आरक्षण सब वर्गों का समाप्त किया जाएl योग्यता के आधार पर सब आगे बढ़ें और हमारे धन का उपयोग देश के विकास में लगाया जाए, क्योंकि धन का कोई रूप नहीं होताl कर के माध्यम से हमारे धन का दुरुपयोग क्यों ? या फिर एक सामान सब वर्गों को लाभ दिया जाएl सामान्य वर्ग इन वर्गों को कब तक पालेगा-पोसेगा ? सरकार गरीब वर्गों को सस्ते दामों पर अन्न देकर इस वर्ग को कामचोर और आलसी बना रही हैं,जिससे इनको अपराध करने का कोई भय नहीं और ये अपना सस्ता अन्न  बेचकर शराब और अन्य कामों में खर्च करते हैंl
इस देश में अब कोई भेदभाव की जरुरत नहीं,समानता होना चाहिएl क्या किसी ने सामान्य वर्ग में जन्म लेकर पाप किया है और किसी ने मात्र जन्म लेकर लाभों का खजाना लूटा…यानी खाना-पीना,रहना पढ़ना-लिखना पदोन्नति पाना सब अपने-आप मिल जाना हैl
यहाँ सामान्य वर्ग मर-मरकर आगे बढ़ने का प्रयास करे,हताशा मिले,ऐसा क्यों ? ये भेदभाव ख़तम होना और सबको समान अवसर मिलना आवश्यक है,जिससे सबके योगदान से देश का विकास हो सके। सवाल यह है कि, आरक्षण का दंश सामान्य वर्ग कब तक झेलता रहेगा और क्यों ?आज जरूरत इस बात है कि, सब परिश्रम करें और सुविधा पाएं। योग्यता की क्षमता के साथ न कोई नीचा और न ऊँचा
हो,समानता ही प्रमुख हो, तभी विकास की सीढ़ी मजबूती पा सकेगी। मत की राजनीति के आरक्षण बंद किया जाना चाहिए,वरना ये वर्गवाद इस देश को गर्त में ले जाएगा।

परिचय- डॉ.अरविन्द जैन का जन्म १४ मार्च १९५१ को हुआ है। वर्तमान में आप होशंगाबाद रोड भोपाल में रहते हैं। मध्यप्रदेश के राजाओं वाले शहर भोपाल निवासी डॉ.जैन की शिक्षा बीएएमएस(स्वर्ण पदक ) एम.ए.एम.एस. है। कार्य क्षेत्र में आप सेवानिवृत्त उप संचालक(आयुर्वेद)हैं। सामाजिक गतिविधियों में शाकाहार परिषद् के वर्ष १९८५ से संस्थापक हैं। साथ ही एनआईएमए और हिंदी भवन,हिंदी साहित्य अकादमी सहित कई संस्थाओं से जुड़े हुए हैं। आपकी लेखन विधा-उपन्यास, स्तम्भ तथा लेख की है। प्रकाशन में आपके खाते में-आनंद,कही अनकही,चार इमली,चौपाल तथा चतुर्भुज आदि हैं। बतौर पुरस्कार लगभग १२ सम्मान-तुलसी साहित्य अकादमी,श्री अम्बिकाप्रसाद दिव्य,वरिष्ठ साहित्कार,उत्कृष्ट चिकित्सक,पूर्वोत्तर साहित्य अकादमी() आदि हैं। आपके लेखन का उद्देश्य-अपनी अभिव्यक्ति द्वारा सामाजिक चेतना लाना और आत्म संतुष्टि है।

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