वर्तमान शिक्षा व्यवस्था-एक ढकोसला

प्रो.स्वप्निल व्यास
इंदौर(मध्यप्रदेश)
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आजकल हर जगह शिक्षा प्रसार की नई-नई योजनाएं बन रही हैं। हमारी राष्ट्रीय सरकार इस बात की घोषणा कर चुकी है कि वह शीघ्र ही देश से निरक्षरता को मिटा देगी,परन्तु विचार यह करना है कि हमारी वर्तमान शिक्षा प्रणाली कैसी है और वह किस प्रकार के जीवन का निर्माण कर रही है तथा हमारी शिक्षा वास्तव में कैसी होनी चाहिए। आधुनिक युग में ख़ासतौर पर राज्य द्वारा  निजी निकायों को शैक्षणिक संस्थान खोलने की अनुमति दी गई है। शिक्षा के ऊपर सरकार के पूर्ण एकाधिकार वाली स्थिति में बदलाव हुआ है,जिसमें निजी संचालकों को फलने-फूलने के अवसर दिए गए हैं। अक्षम व्यक्तियों को उपाधियां प्रदान कर देश को बेरोजगारी,  गरीबी,अराजकता को दावत देना है। यदि मेधावी व्यक्ति को उचित अवसर प्राप्त नहीं होते तो एक तरफ तो वह कुंठाग्रस्त होता है,दूसरी तरफ देश प्रतिभाशाली व्यक्तियों की सेवाओं से वंचित हो जाता है। शिक्षण व्यवस्था द्वारा उत्पादित विद्यार्थी कुशल मजदूरी-पर्यवेक्षक या अर्थ-व्यवस्था के तीसरे क्षेत्र अर्थात सेवा क्षेत्र के लिए तैयार माल की तरह शैक्षणिक संस्थाओं से निकलते हैं। उक्त क्षेत्र यदि इस तैयार माल का उपयोग नहीं कर पाते तो रोजगार या जीविकोपार्जन के लिए वे जो भी रास्ता चुनते हैं उसमें अर्जित शिक्षा की भूमिका नगण्य होती है। यदि व्यापक तौर पर एक सर्वेक्षण किया जाए कि नौकरी न मिलने के बाद युवाओं द्वारा चुनी गई आजीविका में उनकी शिक्षा मददगार हुई या नहीं तो इसके नतीजे भयंकर रूप से निराशाजनक होंगे। इस तरह हम देख सकते हैं कि भारत में युवाओं की संख्या और नौकरी की उपलब्धता को देखते हुए शिक्षा ने न तो रोजगार के प्रति कोई विश्वास पैदा किया है,और न ही वह नैतिक-सामाजिक-राजनीतिक मूल्यों के विकास की दिशा में कोई सकारात्मक पहल कर पाई है। इसकी जगह उसने गलाकाट प्रतियोगिता की दिशा में आक्रामक बन जाने के लिए युवाओं को उकसाया है।
सारांश यही है कि,हमारी शिक्षा केवल कामचलाऊ वस्तु न हो,वह केवल परीक्षा पास करने का माध्यम न हो,वरन हमें भली प्रकार जीना सिखाए।
परिचय-प्रो.स्वप्निल व्यास का निवास इंदौर में ही है। आपकी जन्मतिथि ३ जुलाई १९८४ तथा जन्म स्थान-इंदौर है। 
मध्यप्रदेश राज्य के इंदौर वासी प्रो.स्वप्निल व्यास ने वाणिज्य में स्नातक पश्चात पत्रकारिता में भी स्नातक-स्नातकोत्तर उपाधि हासिल करने के साथ ही पीजीडीबीए,एमबीए,समाज कार्य विषय में एवं लोक प्रशासन में स्नातकोत्तर कर लिया है। आपका कार्य एक निजी महाविद्यालय में सहायक प्राध्यापक का है। सामाजिक गतिविधि-के अंतर्गत सामुदायिक परामर्शदाता का कार्य भी करते हैं। आपकी लेखन विधा-लेख और कविता है,जबकि प्रेरणा पुंज-माता-पिता हैं। स्वप्निल जी के लेखन का उद्देश्य-जागृति,संवाद के लिए स्वतन्त्र लेखन करते रहना है।

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