विजेता इमरान:दुर्जन कभी सज्जन नहीं बन सकता

डॉ.अरविन्द जैन
भोपाल(मध्यप्रदेश)
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भाई जैसा दोस्त नहीं और भाई जैसा दुश्मन नहीं, जी हाँ,मतभेद होना अच्छा है,पर मनभेद होना ख़राबl कहा भी जाता है कि,एक बार दुश्मनी होने पर भरोसा कम करना चाहिएl पाकिस्तान तो मुल्ला,मौलवियों,उग्रवादी,सेना,आईएसआई और पहले अमेरिका तो अब चीन के इशारों पर चलता हैl खैर,-
“खून,खांसी,ख़ुशी,बैर प्रीत मध्यपान,
ये दाबे से दबे नहीं,कह गए चतुर सुजानl”
पाकिस्तान में इमरान का आना कोई नयापन लाने वाला नहीं है,जैसे पहले नागनाथ थे अब सांपनाथ हो गएl हर व्यक्ति की जन्म के समय जो प्रकृति होती है,वह बदल नहीं सकती जबकि आदत समयानुसार बदल जाती हैl इमरान खान पहले तो खिलाड़ी होने से उसका स्वभाव हमेशा आक्रामक और विजयी होने की प्रवृत्ति,यह आदत उसके लिए खेल भावना से हुईl दूसरा राजनीतिक जीवन में तोड़फोड़ की प्रवृत्ति का होना उसको संस्कार में मिला,और जन्मजात गुण उसे स्त्रियों के प्रेम के कारण बहुविवाह और विवाहोत्तर सम्बन्ध,ये सब उसे स्वभाव,संस्कार और नैसर्गिक गुणों से मिलेl
चुनाव जीतना एक प्रबंधन है और उसके लिए सेना का सहयोग मिलना स्वाभाविक तौर पर विजय की दिशा की ओर संकेत करता हैl उसमें उसे सहयोग मिला तथा आज इस स्थिति में आ गया,किन्तु उसका भाषण उसकी मानसिकता को दर्शाता हैl उनके गुण,संस्कृति और स्वभाव में जो जन्मजात नफ़रत उनको घूटी में पिलाई गई है,उसका उगलना स्वाभाविक हैl उनमें यह भावना या घृणा कूट-कूटकर भरी है और वह भी सेना की कठपुतली हैl
उसने स्वीकारा है कि हमारा देश गरीबी,अशिक्षा, बीमारियों,बेरोजगारी और अन्न-भुखमरी जैसी बुनियादी जरूरतों से जूझ रहा हैl पाकिस्तान वर्तमान में इतने क़र्ज़ में डूबा है कि, उससे बाहर निकल पाना दुष्कर कार्य हैl उसके बाद भी अपनी सैन्य शक्ति को बढ़ाने के लिए वह क़र्ज़ के बोझ तले दबा हैl यह आतंकवाद के प्रशिक्षण का केन्द्र है,जिससे पूरे विश्व में बदनाम हो चुका हैl
“आमद कम और खर्चा ज्यादा लक्षण है मिट जाने का,
कूबत कम और गुस्सा ज्यादा लक्षण है पिट जाने काl” वैसे पाकिस्तान अंदर से खोखला हो चुका है,और वह मात्र गधे के ऊपर शेर की खाल औढ़े है,जैसे गरीबी में गीला आटाl उन्होंने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर का राग अलापा,उसके पास इसके अलावा मात्र आतंकवादियों से घुसपैठ कराकर भारत में अशांति फैलाना,आतंक का वातावरण बनाना और आतंक की फैक्ट्री तैयार कर दिन-रात उसी में सलंग्न रहना ही तो काम हैl एक बात जरूर है कि,माचिस की काड़ी पहले स्वयं जलती है,फिर दूसरे को जलाती है,चाहे वह जले या न जलेl शांति की बहाली के लिए पहले स्वयं शांति का पालन करना होगा,अन्यथा मात्र बकवास के कुछ नहीं होना हैl
इमरान खान भारत से अपेक्षा कर रहे हैं कि,वह शांति की पहल करे,अरे भाई अशांति तुम फैला रहे हो इस देश मेंl व्यापारिक रिश्ते तुम्हें बनाना है,भारत को विश्व बाजार की कोई कमी नहीं हैl भारत वर्तमान में इतना सक्षम हो चुका है कि,उसे तुम जैसे राष्ट्रों की कोई जरुरत नहीं हैl घृणा के बीज का रोपण वर्ष ७२ से,जब पूर्वी पाकिस्तान बांग्लादेश बना,उससे अधिक हुआ पर इससे भारत की सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ा,लेकिन नफरत की आग से झुलसा हुआ पाकिस्तान कभी आतंकवाद के ज़रिए भारत को नुक्सान पहुंचाता है तो कभी पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के बहाने उसे अशांति फ़ैलाना अच्छा लगता हैl इसके कारण लाखों घर बर्बाद हो गए,हर जगह मुँह की खानी पड़ रही है, सामने युद्ध करने की क्षमता नहीं है,अलगाववाद के जरिए, अस्थिरता के कारण स्वयं परेशान है और भारत को भी अशांत बनाए हुए हैl
इमरान को कोई राजनीतिक अनुभव नहीं है,मात्र विरोध करते रहे हैंl अब सत्ता में आने पर उनको अपना रुख साफ़ रखना होगाl यदि कठपुतली बने तो वहां अस्थिरता होने में समय नहीं लगता हैl सेना का खिलौना होने से उनके ऊपर कभी भी तलवार लटक सकती हैl अभी से इमरान बिना बहुमत के ऐसा व्यवहार कर रहे हैं,जैसे प्रधानमंत्री बन गए होंl दल चलना अलग बात है,देश चलाना अलग बात हैl

परिचय- डॉ.अरविन्द जैन का जन्म १४ मार्च १९५१ को हुआ है। वर्तमान में आप होशंगाबाद रोड भोपाल में रहते हैं। मध्यप्रदेश के राजाओं वाले शहर भोपाल निवासी डॉ.जैन की शिक्षा बीएएमएस(स्वर्ण पदक ) एम.ए.एम.एस. है। कार्य क्षेत्र में आप सेवानिवृत्त उप संचालक(आयुर्वेद)हैं। सामाजिक गतिविधियों में शाकाहार परिषद् के वर्ष १९८५ से संस्थापक हैं। साथ ही एनआईएमए और हिंदी भवन,हिंदी साहित्य अकादमी सहित कई संस्थाओं से जुड़े हुए हैं। आपकी लेखन विधा-उपन्यास, स्तम्भ तथा लेख की है। प्रकाशन में आपके खाते में-आनंद,कही अनकही,चार इमली,चौपाल तथा चतुर्भुज आदि हैं। बतौर पुरस्कार लगभग १२ सम्मान-तुलसी साहित्य अकादमी,श्री अम्बिकाप्रसाद दिव्य,वरिष्ठ साहित्कार,उत्कृष्ट चिकित्सक,पूर्वोत्तर साहित्य अकादमी आदि हैं। आपके लेखन का उद्देश्य-अपनी अभिव्यक्ति द्वारा सामाजिक चेतना लाना और आत्म संतुष्टि है।

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