विहान

ममता बनर्जी `मंजरी`
दुर्गापुर(पश्चिम बंगाल)
******************************************************************************
रोज सवेरे नभ पर आकर,
मुस्कुराते हैं दिनमान।
कोयल गाती है डाली पर,
खेतों पर जाते किसान।
मेरे मग में छाया तम क्यों,
हैवानों-शैतानों का ?
पूछ रही है बेटी माँ से,
कब होगा अपना विहान ?

दिवस माह सदियाँ हैं बीते,
बदल गया सारा जहान।
मगर हमें न मिला जग में,
आज तक अपना सम्मान।
शक्ति नाम के नित ढिंढोरे,
पीटे जाते धरती पर।
पंख काट कर कहे जमाना,
भरो गगन पर अब उड़ान॥

सीता माँ अपमान सही थी,
पांचाली पर दाँव लगी।
हर काल में नारियाँ ही,
अक्सर जाती रही ठगी ?
रुई डाल कर सोयी जनता,
अब तक अपने कानों में ?
लाख कहें हम ढोल पीटकर,
जनता नींद से है जगी ?

परिभाषा विहान की क्या है,
हमें बताओ तो जानें ?
घोर तमस के बीच फँसे हम,
आप मानें या न मानें।
कोख से लेकर हर जगह पर,
तड़प रही आज नारियाँ।
नभ के सूरज चंदा-तारे,
जग में लगते बेगाने॥

परिचय-ममता बनर्जी का साहित्यिक उपनाम `मंजरी` हैl आपकी जन्मतिथि २१ मार्च १९७० एवं जन्म स्थान-इचाक,हज़ारीबाग (झारखण्ड) हैl वर्तमान पता-गिरिडीह (झारखण्ड)और स्थाई निवास दुर्गापुर(पश्चिम बंगाल) हैl राज्य झारखण्ड से नाता रखने वाली ममता जी ने स्नातक तक शिक्षा प्राप्त की हैl आप सामाजिक गतिविधि में कई साहित्यिक संस्थाओं से जुड़कर नियमित साहित्य सृजन में सक्रिय हैं। लेखन विधा-गीत,ग़ज़ल,लेख सहित साहित्य के लगभग सभी विधाओं में लेखन हैl झारखण्ड के झरोखे से(२०११) किताब आ चुकी है तो रचनाओं का प्रकाशन अखबारों सहित अन्य साहित्यिक पत्रिकाओं में भी हो चुका हैl आपको साहित्य शिरोमणि, किशोरी देवी सम्मान,अपराजिता सम्मान सहित पूर्वोत्तर विशेष सम्मान और पार्श्व साहित्य सम्मान आदि मिल चुके हैंl विशेष उपलब्धि में झारखण्ड प्रदेश में एक साहित्य संस्था का अध्यक्ष होना और अन्य में भी पदाधिकारी होना हैl इनकी लेखनी का उद्देश्य-हिंदी को आगे बढ़ाना है। आपके लिए प्रेरणा पुंज-झारखण्ड का परिवेश हैl आपकी विशेषज्ञता-छंदबद्ध कविता लेखन में हैl

Hits: 10

आपकी प्रतिक्रिया दें.