वीरे दी वेडिंग

इदरीस खत्री
इंदौर(मध्यप्रदेश)
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ट्रेलर समीक्षा……………..
दोस्तों,भारतीय संस्कृति में गालियों की जगह न के बराबर है,और यही गालियां अगर लड़किया दें तो नाकाबिले बर्दाश्त होगी,लेकिन ‘वीरे दी वेडिंग’ फिल्म के ट्रेलर में लड़कियों की तरफ से बिंदास गालियां दी जा रही है। ४ दोस्त लड़कियों का समूह है जो शादी के पहले सोहबत करना चाह रही है।
भारत में शादी को केवल दो जिस्मों का धार्मिक मिलन ही नहीं,वरन दो आत्माओं का मिलन माना गया है,  वो भी जन्म-जमान्तर का। साथ ही विवाह केवल २ इंसानों का नहीं,२ परिवारों का मिलन होता है,लेकिन इस फ़िल्म में विवाह पर उंगली उठाई गई है। साथ ही लड़के के रिश्तेदारों को सम्मान और अपनाने की बजाय देने लड़कियां उसका मखौल उड़ाती नज़र आई। फिर लड़कियां चरम सुख पर चर्चा करती नज़र आ रही हैं,चरम सुख निश्चित ही किसी इंसान की ज़रूरत हो सकता हो,लेकिन यह बन्द कमरे में पति-पत्नी की नितांत निजी चर्चा और विषय है। इसका जिक्र कमरे के बाहर निश्चित रूप से अश्लील माना जाता है। एक कुंवारी लड़की अपनी सहेलियों से अंग्रेजी में संवाद बोलती है-एक साल से संभोग नहीं किया’।
ठीक है बालाजी प्रोडक्शन बोल्ड फिल्मों का पक्षधर रहा है और उनकी वेब श्रंखला में भी लड़कियां  खूब गालियां देती नज़र आई थी लेकिन,आप भारतीय संस्कृति पर क्यों घात पर घात किए जा रहे हैं,और क्या हम दकियानूसी परम्पराओं के साध जी रहे हैं ?
हमारी संस्कृति-सभ्यता इतनी  विशाल और सुसभ्य है कि,हज़ारों साल के आक्रमण एवं हम पर राज से भी नहीं टूटी,बिखरी है। एक अन्य संवाद में लड़की दूसरी लड़की से बोलती है- तेरी लेने के लिए अब लड़के के पास डिग्री भी होना चाहिए’। इसमें इशारा किधर है,पूरा देश ज़ानता है।
दरअसल,आध्यात्म और सम्भोग नितांत निजी विषय है,जिसका जिक्र बाहर नहीं होना चाहिए। ‘मंगलसूत्र’,यानी उस माला का नाम ही मंगल के साथ जुड़ा हुआ है। हर भारतीय नारी चाहे किसी भी धर्म की हो,मंगल सूत्र की अहमियत और पवित्रता समझती है,किंतु फ़िल्म में खूब कसकर मखौल उड़ाया गया है।
सवाल यह है कि,इस प्रकार की गंदगी परोसकर क्या मिलेगा आपको..? खैर मुझे ट्रेलर बुरा लगा,जिसमें भारतीय संस्कृति और तहज़ीब का मज़ाक बनाया गया है। पश्चिमी देशों में सम्भोग विषय आम चर्चा है,लेकिन भारत में नहीं।  केन्द्रीय फिल्म प्रमाणन मंडल ने किसी भी गाली पर बीप नहीं बजाई या उन्होंने भी लड़कियों के मुंह से गाली का मजा लिया,तभी कट या बीप नहीं बजाई है।
फ़िल्म के बारे में ज्यादा कुछ लिखने की इच्छा नहीं,न ही मैं दकियानूसी विचारों का समर्थक हूँ,लेकिन भारतीय हूँ,और मेरे देश की स्त्री की मान-मर्यादा को भली-भांति समझता हूँ।
परिचय : इंदौर शहर के अभिनय जगत में १९९३ से सतत रंगकर्म में इदरीस खत्री सक्रिय हैं,इसलिए किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। परिचय यही है कि,इन्होंने लगभग १३० नाटक और १००० से ज्यादा शो में काम किया है। देअविवि के नाट्य दल को बतौर निर्देशक ११ बार राष्ट्रीय प्रतिनिधित्व नाट्य निर्देशक के रूप में देने के साथ ही लगभग ३५ कार्यशालाएं,१० लघु फिल्म और ३ हिन्दी फीचर फिल्म भी इनके खाते में है। आपने एलएलएम सहित एमबीए भी किया है। आप इसी शहर में ही रहकर अभिनय अकादमी संचालित करते हैं,जहाँ प्रशिक्षण देते हैं। करीब दस साल से एक नाट्य समूह में मुम्बई,गोवा और इंदौर में अभिनय अकादमी में लगातार अभिनय प्रशिक्षण दे रहे श्री खत्री धारावाहिकों और फिल्म लेखन में सतत कार्यरत हैं। फिलहाल श्री खत्री मुम्बई के एक प्रोडक्शन हाउस में अभिनय प्रशिक्षक हैंl आप टीवी धारावाहिकों तथा फ़िल्म लेखन में सक्रिय हैंl १९ लघु फिल्मों में अभिनय कर चुके श्री खत्री का निवास इसी शहर में हैl आप वर्तमान में एक दैनिक समाचार-पत्र एवं पोर्टल में फ़िल्म सम्पादक के रूप में कार्यरत हैंl 

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