वीरों का सम्मान

पवन कुमार ‘पवन’ 
सीतापुर(उत्तर प्रदेश)

******************************************************

जिनकी मंजिल सिर्फ विजय है,
नहीं मौत का जिनको भय है।
जो स्वदेश की रक्षा में हो जाते हैं बलिदान,
युगों-युगों तक इस धरती पर 
उनका हो सम्मानll 
 
किसी सिंहनी माँ के जाए,
अदभुत साहस के स्वामी हैं।
टकरा जाते तूफानों से,
जो वीरों के अनुगामी हैंll 
 
दिनकर का सब तेज विलय है,
डरता जिनसे महाप्रलय है।
हिमगिरि भी नतमस्तक होकर,
गाए जिनका गान।
युगों-युगों तक इस धरती पर,
उनका हो सम्मानll 
 
युद्ध क्षेत्र में जिनका कौशल,
अरिदल के छक्के छुड़वाए।
क्रुद्ध शेर की झपटों से ज्यों,
श्रृंगालों में भय छा जाएll 
 
राष्ट्र प्रेम का सिंधु हृदय है,
चहुँदिशि में जिनकी जय-जय है।
मातृभूमि के यज्ञ-पात्र में,
करें शीश का दानl 
युगों-युगों तक इस धरती पर,
उनका हो सम्मानll 
परिचय-पवन कुमार यादव का साहित्यिक उपनाम ‘पवन’ है। आपकी जन्मतिथि २० जुलाई १९९१ और जन्म स्थान-ग्राम गनेरा,जनप-सीतापुर (उत्तर प्रदेश )है। यहीं पर आपका वर्तमान निवास है। उत्तर प्रदेश के श्री यादव ने स्नातक तक शिक्षा हासिल की है। आपका कार्यक्षेत्र कृषि कार्य करना है। साथ ही कविता लेखन भी करते हैं। लेखन विधा-छंद,गीत,मुक्तक तथा ग़ज़ल है। इनकी रचनाओं का प्रकाशन मासिक पत्रिका सहित अंतरजाल और ई-पत्रिका पर भी हुआ है। प्राप्त सम्मान में आपके नाम साहित्य भूषण सम्मान-२०१७,श्रेष्ठ छंदकार सम्मान,साहित्य गौरव सम्मान एवं सवैया साधक आदि दर्ज हैं। पवन कुमार यादव की लेखनी का उद्देश्य राष्ट्रभाषा हिन्दी की प्रगति व राष्ट्र सेवा है।

Hits: 46

आपकी प्रतिक्रिया दें.