वृक्ष से सीख

ब्रजेश पाण्डेय
बोकारो(झारखंड)
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एक वृक्ष;
छाया,फल,पुष्प,औषधि,
और अंत में फर्नीचर बन
संवर्धित करता है,
मानव सभ्यता कोl

वही वृक्ष अपना हवन कर
खुद को कोयला बनाता है,
खुद जलकर भी,
तृप्त कर जाता है
मानव की भूख कोl

कुछ वृक्ष तो
कोयला बनकर भी,
नहीं होते खामोश
अत्यधिक ताप,
और दाब झेलकर भी
परार्थ,
खुद को हीरा बनाते हैं
और,इस तरह
मानव के सरताज पर,
जड़ित हो जाते हैं।

हे मानव!
तू वृक्ष बनll

परिचय-ब्रजेश पाण्डेय का जन्म १ जुलाई १९९० में मधपुर(जिला-देवघर,झारखण्ड) में हुआ हैl वर्तमान में झारखंड स्थित बोकारो स्टील सिटी में रहते हैं,जबकि स्थाई बसेरा मधपुर में ही हैl आपकी शिक्षा बी.टेक. हैl सामाजिक गतिविधि के अंतर्गत सामाजिक कार्यकर्ता हैंl इनकी लेखन विधा-गीत,ग़ज़ल,कहानी,कविता और लेख हैl रचनाओं का प्रकाशन पत्र-पत्रिकाओं में हुआ हैl कई साहित्यिक प्रतियोगिताओं में विजेता रहे हैंl विशेष उपलब्धि में एक पत्रिका में ३ वर्ष तक संपादन का कार्य करना और साहित्यिक संगठन में महासचिव होना हैl श्री पाण्डेय की लेखनी का उद्देश्य-राष्ट्र जागरण करना हैl आपके लिए प्रेरणा पुंज-स्वामी विवेकानकन्द हैंl इनकी विशेषज्ञता-कविता लेखन में हैl

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