वृद्धाश्रम से माँ का पत्र बेटे के नाम

डॉ.आभा माथुर
उन्नाव(उत्तर प्रदेश)
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प्यारे बेटे,
       ख़ुश रहो। मैं यहाँ बहुत आराम से हूँ। तुम ख़ुश रहना और बहू व बच्चों की ख़ुशी का ख़्याल रखना। वृद्धाश्रम कोई ऐसी बुरी जगह नहीं है,जैसी मैं समझती थी। दोनों समय खाना और चाय आदि मिल जाती है वह भी बिना ताने सुने। अपनी हमउम्र स्त्रियों का साथ भी मिल जाता है।
घर में तो तुम लोगों के साथ मैं स्वयं को बहुत बूढ़ी और अकेली अनुभव करती थी,तुम लोग नए ज़माने वाले जो ठहरे। और तो सब ठीक है,पर बबलू की याद आती है। उसके खाने का ध्यान रखना। उसे कहानी सुनते हुए खाना खाने की आदत है,बहुत मनाकर खिलाना पड़ता है। मैं भी कैसी पागल हूँ,बबलू तुम्हारा बेटा है,उसका ध्यान रखने को कहने की क्या ज़रूरत है! वह तो तुम रखते ही होगे।मुझे तो ख़ुशी है कि अब तुम्हारे और बहू के बीच झगड़े नहीं होंगे,जो मेरे कारण होते थे (बन्द कमरे में से भी  ‘मम्मी’ शब्द बार बार सुनाई देता था।)। मैं तो इस दुनिया में थोड़े दिन ही और रहूँगी,पर उसके साथ तो तुम्हें जीवन काटना है इसलिए मेरे कारण उससे सम्बन्ध मत ख़राब करो। आ न सको,तो कभी-कभी फ़ोन कर लिया करना।बहू व बच्चों को प्यार…।
                तुम्हारी मम्मी
परिचय-डॉ.आभा माथुर की जन्म तारीख १५ अगस्त १९४७ तथा जन्म स्थान बिजनौर (उत्तर प्रदेश)हैl आपका निवास उन्नाव स्थित गाँधी नगर में हैl 
उन्नाव  निवासी डॉ.माथुर की लेखन विधा-कविता,बाल कविताएं,लेख,बाल कहानियाँ, संस्मरण, लघुकथाएं है। सामाजिक रुप से कई संगठनों से जुड़कर आप सक्रिय हैं। आपकी पूर्ण शिक्षा फिलासाफी ऑफ डॉक्टरेट है। कार्यक्षेत्र उत्तर प्रदेश है। सरकारी नौकरी से आप प्रथम श्रेणी राजपत्रित अधिकारी पद से सेवानिवृत्त हुई हैं। साझा संग्रह में डॉ.माथुर की कई रचनाएं प्रकाशित हो चुकी हैं। साथ ही अनेक रचनाएं विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में भी प्रकाशित हैं। सामाजिक मीडिया समूहों की स्पर्धाओं में आप सम्मानित हो चुकी हैं। इनकी विशेष उपलब्धि आँग्ल भाषा में भी लेखन करना है। आपकी लेखनी का उद्देश्य आत्म सन्तुष्टि एवं सामाजिक विसंगतियों को सामने लाना है, जिससे उनका निराकरण हो सके। आपमें दिए गए विषय पर एक घन्टे के अन्दर कविता लिखने की क्षमता है। अंग्रेज़ी भाषा में भी लिखती हैं।

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