वेदना बेटी की

चंद्रेश भार्गव 
लटेरी(मध्यप्रदेश)

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वो मुस्कुरा रही थी,या गम छिपा रही थी,
मायूस थी वो बेटी,हँसकर दिखा रही थी।
दुनिया ने देखा उसको,उसके आवारापन को,
कितने ही गम थे उसके,सबको भुला रही थी।
अनजान शहर में खड़ी,सामान बेचती हुई,
सामान खरीदी को,सबको मना रही थी।
दुनिया की नजरें उसके,चहरे पे थी बदन पे,
कैसे अकेली लड़की,नजरें मिला रही थी।
मजबूरी परेशानी,अपनी छिपा रही थी,
मायूस थी वो फिर भी,हँसकर दिखा रही थी॥
दुनिया के दिए ताने,कैसे वो सह रही थी,
लोगों के वहसीपन से,खुद को बचा रही थी।
कैसी वो क्या घड़ी थी,मजबूरी क्या बड़ी थी,
जिसकी बजह से बेबस,सड़कों पे आ खड़ी थी।
मजबूरियाँ दिखी न,तमाशबीनियों को,
देखा वही सभी ने,जिसको छिपा रही थी।
मायूस थी वो फिर भी,हँसकर दिखा रही थी॥
परिचय-चंद्रेश भार्गव का जन्म स्थान- सतपाडॉ लटेरी और जन्मतिथि १० फरवरी १९८३ है। इनका निवास लटेरी-जिला विदिशा (मध्यप्रदेश)में है। शिक्षा एम.ए.(हिन्दी साहित्य)है। आप निजी विद्यालय (तहसील लटेरी)में शिक्षक के तौर पर कार्यरत हैं। लेखन विधा-गीत और कविता है।

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