वो दीपावली कब आयेगी

संध्या चतुर्वेदी ‘काव्य संध्या’
अहमदाबाद(गुजरात) 
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दीपावली पर्व विशेष, दीप पर्व आपको आलोकित करे…..


दीपावली का त्यौहार भारतवर्ष में बहुत ही धूमधाम से मनाया जाने वाला त्यौहार है। प्राचीन मान्यता के अनुसार जब सतयुग में श्री रामचंद्र को १४ वर्ष का वनवास हुआ था,तब अयोध्या वासी बहुत दुखी हो गए थे और चौदह वर्ष के लंबे अंतराल के बाद जब उन्हें प्रभु श्री राम के अपनी नगरी में पुनः आगमन का समाचार प्राप्त हुआ तो सभी बहुत प्रसन्न हुए।
कार्तिक मास की अमावस्या को प्रभु श्री राम ने अपना चौदह वर्ष का वनवास खत्म करके अयोध्या नगरी में प्रवेश किया था। इस खुशी के अवसर पर अयोध्यावासियों ने अयोध्या को दुल्हन की भांति सजाया और घर-घर में दीप दान कर अपनी खुशी को व्यक्त किया। तभी से हर वर्ष कार्तिक मास की अमावस्या को दीपावली का पर्व मनाया जाता है।
यह कथा सतयुग की थी और अभी कलयुग चल रहा है। कलयुग में प्रभु श्री राम को फिर से वनवास मिला है और ये वनवास भारत की अदालतों ने दिया है,जिसकी समय सीमा भी तय नहीं है।
पता नहीं,कब अवधपुरी के लोग अपने श्री राम को पुनः उनकी नगरी में देख पाएंगे,क्योंकि अयोध्या जो श्री राम की नगरी है,उसमें बाबरी मस्जिद और मंदिर निर्माण का झगड़ा समाप्त होने के आसार नही दिख रहे हैं। भाजपा १९९० से “राम लाल हम आयेंगे,मंदिर वहीं बनायेंगे” का नारा सिर्फ और सिर्फ वोट बैंक के लिए लगाती आ रही है।
जब भाजपा सत्ता में आती है तो सारे वादे दरकिनार कर दिए जाते हैं। बेचारी जनता जो वर्षों से अपने प्रभु राम को मंदिर में देखने की आस लिए मतदान करती और प्रकरण की सुनवाई भी होती है,पर फैसला आज तक ना हुआ ना ही होता नजर आता है। “मिलती है तो सिर्फ तारीख पर तारीख”…इसी आस में कितनी दीपावली निकल गयी,सरकारें आयी और निकल गयी,पर ना मस्जिद का इंसाफ हुआ,ना मंदिर को न्याय मिला।
सवाल अब भी वही है कि कब अयोध्या में फिर से वही दीपावली मनाई जायेगी…।

परिचय : संध्या चतुर्वेदी का साहित्यिक नाम काव्य संध्या है। आपने बी.ए. की पढ़ाई की है। कार्यक्षेत्र में व्यवसाय (बीमा सलाहकार)करती हैं। २४ अगस्त १९८० को मथुरा में जन्मीं संध्या चतुर्वेदी का स्थाई निवास मथुरा(उत्तर प्रदेश)में है। फिलहाल अहमदाबादस्थित बोपल (गुजरात)में बसी हुई हैं। कई अखबारों में आपकी रचनाओं का प्रकाशन हो चुका है। लेखन ही आपका शौक है। लेखन विधा-कविता, ग़ज़ल, मुक्तक, दोहा, धनाक्षरी, कह मुकरिया,तांका,लघु कथा और पसंदीदा विषय पर स्वतंत्र लेखन है। संध्या जी की लेखनी का उद्देश्य समाज के लिए जागरुक भूमिका निभाना है। आपको लेखन के लिए कुछ सम्मान भी मिल चुके हैं|

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