व्रत मनाएं स्नेह से

संध्या चतुर्वेदी ‘काव्य संध्या’
अहमदाबाद(गुजरात) 
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पितृ अमावस्या आयी।
करते सब पितृ विदायी॥
आयेगी नवरात्रि अब।
 घर-घर में हो भक्ति तब॥
नौ दिन  करते उपवास।
न करे कोई उपहास॥
ज्योति जलाएं प्रेम से।
 व्रत मनाएं स्नेह से॥
भाव से भेंट चढ़ाये।
माँ की आरती गाये॥
झूमे सभी मस्ती में।
गरबा खेले भक्ति में॥
करें नहीं कोई पाप।
न हो कोई संताप॥
 होगी सभी पूर्ण आस।
करें यही दृढ़ विश्वास॥
परिचय : संध्या चतुर्वेदी का साहित्यिक नाम काव्य संध्या है। आपने बी.ए. की पढ़ाई की है। कार्यक्षेत्र में व्यवसाय (बीमा सलाहकार)करती हैं। २४ अगस्त १९८० को मथुरा में जन्मीं संध्या चतुर्वेदी का स्थाई निवास मथुरा(उत्तर प्रदेश)में है। फिलहाल अहमदाबादस्थित बोपल (गुजरात)में बसी हुई हैं। कई अखबारों में आपकी रचनाओं का प्रकाशन हो चुका है। लेखन ही आपका शौक है। लेखन विधा-कविता, ग़ज़ल, मुक्तक, दोहा, धनाक्षरी, कह मुकरिया,तांका,लघु कथा और पसंदीदा विषय पर स्वतंत्र लेखन है। संध्या जी की लेखनी का उद्देश्य समाज के लिए जागरुक भूमिका निभाना है। आपको लेखन के लिए कुछ सम्मान भी मिल चुके हैं

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