शब्द

टीना जैन 
उदयपुर(राजस्थान)
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शब्दों के तार
वाणी की वीणा से,
इस कदर छोड़ो
कि बरबस ही मुँह से,
‘वाह’ निकल जाएI
बिना सुर-लय-ताल के
शब्द वो काँटे हैं,
जो दिल को चुभे और
मुँह से ‘आह’ निकल जाए।
शब्दों को फूहड़ता के
धागे में पिरोता है,
हर शब्द के दो अर्थ
निकालता है।
अश्लीलता,अभद्रता,फूहड़ता
और क्या कहूँ मैं,
शब्द खुद लजाकर
अपनी विशालता खोता है।
हँसी-ठिठोली अच्छी,
फूहड़ परिहास नहीं भाता है
पर,आज हर मंच
इससे दूषित होता है।
शब्दों की मरोड़न से जब
जग ठहाके लगाता है,
सच कहती हूँ,
मेरा मन बहुत आहत हो जाता है॥
परिचय-श्रीमति टीना जैन का रिश्ता प्रसिद्ध राज्य राजस्थान से है। २५ नवम्बर १९८० में आपका जन्म हुआ है।  शिक्षा स्नातक सहित एम.ए.,बी.एड. तथा एम.एड. भी है। बतौर गृहिणी आप शहर उदयपुर के ऋषभदेव-खेरवाड़ा (तहसील रोड) में रहती हैं। आपकी रुचि कविता लेखन में है। आप मीडिया के सामाजिक मंच पर सक्रिय हैं। एक साझा काव्य संग्रह में आपकी रचना प्रकाशित हुई है। आप अधिकतर कविताएँ लिखती हैं। विशेष रुप से यह सामाजिक कटाक्ष लिखती हैं। लेखन का उद्देश्य पसंद का काम और हिन्दी से प्रेम है। 

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