शहीद

पवन गौतम ‘बमूलिया’
बाराँ (राजस्थान)
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(झालावाड़ के शहीद मुकुट बिहारी मीना को श्रदांजलि)
हाड़ाओं की जननी का
रहा पूर्व इतिहास।
तन-मन जीवन सौंपते
माँ जननी के पासll

 

झालावाड़ी बाँकुरा
मीना मुकुट बिहारीl
राजस्थानी वीरवर
तुम पर हम बलिहारिll

 

झालावाड़ी जिले की
खानपुर तहसीलl
लड़ानिया के गाँव का
अलबेला शमशीरll

 

नन्हीं आरू के पिता
अंजनि के भरतार।
मात-पिता का लाड़ला
तेरी जय-जयकारll

 

जम्मू अरु काश्मीर में
तैनाती जांबाज।
कुपवाड़ा में कर रहा
सर्च ऑपरेशन काजll

 

एक बैरन गोली चली
गई कलेजा चीर।
साहस तो देखो जरा
नहिं घबराया वीरll

 

गोली खाकर भी मुकुट
लड़ता रहा अबाध।
आतंकी को मारता
रहा सिंह निर्बाधll

 

चिरनिंद्रा में सो गया
आखिर झाला शेर।
अविस्मरणीय रहे
युद्धक घोर घमेरll

 

जगन्नाथ तू धन्य है
कहा फ़क्र है आज।
मेरा बेटा आ गया
देशप्रेम के काजll

 

कहा अंजनी ने मचल
जय-जय हिंदुस्तान।
मेरा धन्य सुहाग है
आन-मान,अभिमानll

 

गजब कमांडो वीर था
गजब शौर्य शमशीर।
कण-कण जिसको तरसता
वो पाई तकदीरll

 

गाँव अमर तहसील भी
जिला अमर आबाद।
परिजन प्रियजन सब अमर
योद्धा जिन्दाबादll

 

प्राणों का उत्सर्ग कर
किया रक्त अभिषेकl
तारों में जाकर मिला
टिम-टिम करती रेखll

 

नाम मुताबिक़ काम कर
लिखा व्योम पर नाम।
तेरी जय गाथा ‘पवन’
गाए सुबहो-शामll

परिचय –पवन कुमार गौतम का साहित्यिक उपनाम-बमूलिया है। जन्म तारीख ३ जुलाई १९७५ एवं जन्म स्थान-बमूलिया कलाँ जिला बाराँ (राजस्थान)है। वर्तमान में बमूलिया कलाँ तहसील अन्ता जिला बाराँ में ही निवास है। स्थाई पता भी यही है। शिक्षा स्नातकोत्तर (अंग्रेजी, हिंदी, राजस्थानी साहित्य, संस्कृत साहित्य,दर्शन शास्त्र,समाज शास्त्र और राजनीति विज्ञान)एवं शिक्षा स्नातक (बी.एड.)है। कार्यक्षेत्र-अध्यापन का है। श्री गौतम सामाजिक कार्य के अन्तर्गत  समयानुसार यथासक्ति कार्यों में मदद करते हैं। इनकी लेखन विधा-कविता, गीत, छन्द, मुक्तक, रूबाई, ग़ज़ल, सजल, गीतिका,नज़्म तथा कव्वाली है। ओज रस की कविताओं का काव्य संकलन प्रकाशाधीन है,तो अनेक पत्र- पत्रिकाओं में रचनाओं का प्रकाशन जारी है। आपको विद्यालय एवं विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों सहित कोटा शैक्षणिक मंच तथा साहित्यिक मंचों से भी सम्मानित किया गया है। विशेष उपलब्धि में संगीत- गायन विधा में पारंगत होना है। आप वैदिक संस्कृत,पांडित्य एवं ज्योतिष में अध्ययनरत हैं। इनकी लेखनी का उद्देश्य-स्वान्त सुखाय एवं परम चेतना की अनुभूति के साथ ही प्रकृति के साथ सामन्जस्य स्धापित करना व मानवीय मूल्यों के महत्व का प्रतिपादन है। आपके लिए प्रेरणा पुंज-माता श्रीमती शांति बाई गौतम और पिता बृजमोहन गौतम सहित विष्णु विश्वास दाधीच(कवि-गीतकार), साहित्यिक गुरू स्व. गिरिधारीलाल मालव (हाड़ौती के प्रेमचन्द) एवं धर्म पत्नी सुनीता पंचोली है। इनकी विशेषज्ञता आशु काव्य वाचन व लेखन में है। 

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