शिरोधार्य हिन्दी

विजयसिंह चौहान
इन्दौर(मध्यप्रदेश)
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विश्व हिन्दी दिवस विशेष-१० जनवरी
भारत माता के
माथे की ‘बिंदी’ है,
हिन्दी।

मेरा गर्व,
मेरा स्वाभिमान है,
हिन्दी।

सुंदर,सरल ,
सहज है
हिन्दी।

कल-कल बहती
निर्मल जल-सी,
पावन धार है
हिन्दी।

अनेकता में एकता का
स्वर और
वैश्विक धरोहर है,
हिन्दी।

रग-रग में दौड़ती,
हर भारतीय की
पहचान है,
हिन्दी।

साहित्य के सागर में
पुलकित,
पल्लवित,आकाश है,
हिन्दी।

क,ख,ग से
आदि,अनन्त तक
संपूर्ण ब्रहमांड है,
हिन्दी॥

परिचय : विजयसिंह चौहान की जन्मतिथि ५ दिसम्बर १९७० और जन्मस्थान इन्दौर(मध्यप्रदेश) हैl वर्तमान में इन्दौर में ही बसे हुए हैंl इसी शहर से आपने वाणिज्य में स्नातकोत्तर के साथ विधि और पत्रकारिता विषय की पढ़ाई की,तथा वकालात में कार्यक्षेत्र इन्दौर ही हैl श्री चौहान सामाजिक क्षेत्र में गतिविधियों में सक्रिय हैं,तो स्वतंत्र लेखन,सामाजिक जागरूकता,तथा संस्थाओं-वकालात के माध्यम से सेवा भी करते हैंl लेखन में आपकी विधा-काव्य,व्यंग्य,लघुकथा और लेख हैl आपकी उपलब्धि यही है कि,उच्च न्यायालय(इन्दौर) में अभिभाषक के रूप में सतत कार्य तथा स्वतंत्र पत्रकारिता जारी हैl

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