शिवराज का मार्ग सुगम जीत के लिए!

डॉ.अरविन्द जैन
भोपाल(मध्यप्रदेश)
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मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री शिवराजसिंह ने अपने पूरे कार्यकाल में इतनी अधिक लोकप्रियता पा ली है कि,उन्हें अब उतनी मेहनत नहीं करना पड़ेगी जितनी कांग्रेस कोl कांग्रेस दल और शिवराज बराबर हैं और भारतीय जनता पार्टी इस समय विश्व की बहुत बड़ी पार्टी हैl इनका संगठन यानी नेटवर्क बहुत अच्छा हैl वो २०१८ के चुनाव का लक्ष्य नहीं रखते,उनकी आँख इस समय वर्ष २०२३ के चुनाव पर है कि,उस समय हमारा कार्यकाल कैसा होगा और कैसा करेंगे ? घोषणा पुरुष ने दिन- रात एक कर बहुत संघर्ष कर अपने-आपको स्थापित कर लिया हैl शिवराज ने `मामा` के रूप में अपना अद्वितीय स्थान न केवल प्रान्त में,वरन देश और विश्व में अपने प्रदेश-देश को गौरवान्वित कियाl सत्ता पर पार्टी में मजबूत पकड़ के कारण उनके सामने नतमस्तक है,और जिन्होंने भी अपने-आपको स्थापित करने की कोशिश की,उसे दरकिनार कर दिया और उसे धूल चटा दी,चाहे वरिष्ठतम क्यों न होl आज की तारीख में वो निर्विवाद नेता है,जिसकी छवि नापाक होते हुए भी पाक साफ़ हैl इसमें उनकी कुशलता हैl
सामान्य परिस्थिति के होने के बाद अपना शुरूआती जीवन संघ से शुरू कर पार्टी के कार्यकर्ता के रूप में स्थापित कर पहले विधायक,सांसद और मुख्यमंत्री बनेl शुरूआती दौर में लगा कि,उनकी प्रशासन पर पकड़ नहीं हैं,पर उन्होंने अपनी पुराने संस्कारों की वजह से मितभाषी और सरल होने से अपनी छाप अमिट छोड़ीl एक बार एक बैल को बहुत बड़ा जख्म हुआl उस पर बहुत सारी मक्खियाँ बैठी थी और बैल शांत भाव से बैठा थाl एक साधु प्रकृति का व्यक्ति वहां से निकला तो उसने बैल के जख्म में मक्खियाँ बैठी देखीl उसने उनको उड़ाया तो बैल साधु को मारने दौड़ाl इस पर साधु ने बैल के मालिक को बोला कि,मैंने तो इसकी मक्खियाँ उड़ाई और बैल मुझे मारने दौड़ाl मालिक बोला-भैया,जो मक्खियाँ जख्म पर बैठी थी,वे भरे पेट थी और तुमने उड़ा दी तो जो नयी मक्खियाँ बैठेगी वे और खून चूसेंगी,और वही किया शिवराज नेl शिवराजसिंह ने पहले चरण में स्व विकास किया और उसके बाद लोककल्याणकारी राज्य होने से `मुखिया ऐसा चाहिए,खान-पान सो एक`,सो उन्होंने पहले स्वयं का विकास कियाl फिर अपने कैबिनेट मंत्रियों का,उसके बाद सचिवों का, विधायकों का,अध्यक्षों का,अपनी पार्टी-कार्यकर्ताओं को और विपक्षी पार्टी को भी उपकृत किया,जिसके कारण पूरा प्रदेश मनपसंद प्रदेश बन गयाl सुविधा शुल्क से सुविधाओं को लो और सबको लाभ दो और लोl
मनपसंद सरकार की अभिरचना की कल्पना से शिवराज को `जगत मामा` की संज्ञा मिली और और वे कहीं कंस मामा या शकुनि मामा के रूप में भी दिखाई दिएl जिन्होंने भी उनका प्रतिरोध किया,उसे चौगान चित्त किया,चाहे राघव जी हो या लक्ष्मीकांत शर्माl सरकार में तीसरी बार आने पर उनमें अहम भाव आने लगा और केन्द्र को भरपूर सहायता देने के बाद वे दूध देने वाली गाय होने से उनकी लातें भी अच्छी लगने लगी तथा केन्द्र सरकार और पार्टी ने उनके कारनामों को नज़र अंदाज़ कर दियाl धीरे-धीरे प्रशासनिक पकड़ मजबूत होने से उनके द्वारा बहुत सारी योजनाएं शुरू की गई और वे `घोषणा वीर`बन गएl इनके कार्यकाल में बहुत अमन-चैन रहाl किसानों को स्वर्गवासी बनाकर स्वर्ग के सुख दिए,जिससे वे दुबारा वे अपनी मांग नहीं मांग सकेl भांजियों के मामा जरूर बने पर,भानजा न बना पाने के कारण बलात्कार,यौनाचार,आत्महत्याएं बहुत बढ़ी.और कुछ मामलों में तो मनपसंद सरकार में सरकारी कर्मचारियों को बहुत राहत दीl उस कारण कर्मचारी बहुत संतुष्ट हो गए,और उनका पूरा सहयोग मिलेगाl शिवराज ने पूरा दिल खोलकर अपना कोष खोल दिया,जिस कारण उन्हें चार्वाक का सिद्धांत अपनाना पड़ा और स्वयं सरकार में आने पर उनके उत्तराधिकारी की स्थिति वैसी ही होंगी,जैसे-विधवा और ऊपर से गर्भवतीl
वैसे `मनपसंद सरकार` में बहुत अमन-चैन और शांति है,प्रदेश में कानून व्यवस्था बहुत चाक-चौबंद हैंl यहाँ `लॉ` (लाओ) और `आर्डर` बहुत अच्छा हैl इस सरकार में बिना लक्ष्मी जी के या रिज़र्व बैंक के गवर्नर के काम नहीं होता हैl हमारे मुख्यमंत्री और मंत्री नारदीय लक्ष्मी विलासी हैl लक्ष्मी जी के बिना उन्हें मजा नहीं आताl इस काल खंड में सभी का बहुत विकास हुआl योजनाएँ तो बनाई जाती हैं योजनाबद्ध तरीके सेl हमारे मनपसंद प्रदेश में सड़क,पानी,बिजली,स्वास्थ्य,शिक्षा, गरीबों को भवन सुविधाएं बहुत दी गयी हैं और बिना मेहनत के अन्न प्रदाय किया जाता हैl गैस चूल्हा दिया गया,और अब गैस नहीं खरीद पा रहे हैंl
वास्तव में मनपसंद सरकार के मुखिया ने दिन-रात परिश्रम का प्रदेश के विकास में कोई कमी नहीं छोड़ी,इसीलिए उन्हें उसके बाद भी दिन-रात श्रम करना पड़ रहा हैl आगामी चुनाव में जनता के विकास में जितना परिवर्तन होना था,हुआ पर स्वयं का अकल्पनीय परिवर्तन हुआl मुखिया के ऊपर कितने भी आरोप लगे,पर मुखिया बेदाग रहेl यही है इनके पदासीन होने का रहस्यl अब प्रदेश क़र्ज़ में डूबा है,किसान स्वर्गवासी होकर स्वर्ग का आनंद ले रहे हैं,सड़कें बनने के बाद फिर अपनी सुरक्षा-सुधार के लिए रोती हैं,मेडिकल महाविद्यालय खुल रहे हैं और अधोसरंचना का अभाव होने से यह स्थिति है कि फौज के पास हथियार नहीं हैl पहले से संचालित संस्थाओं में तो अधोसंरचना का अभाव वैसे ही है,और इनको खोलकर क्या मिलेगा,कब तक मिलेगा और कितनी गुणवत्ता का मिलेगा,वह शिव जी जानेंl
इस समय दल और सरकार का बोल-बाला हैl प्रधान सेवक को सब अनियमितताओं की जानकारी होने पर भी शिवराज से प्रसन्न हैं,और पार्टी अध्यक्ष को नियमित सुविधा पहुंचने के कारण उनकी कृपा शिवराज पर रहती हैl मनपसंद सरकार के विकास का पैमाना क्या होना चाहिए,तो सिर्फ इतना देखना काफी होगा कि,इनके सम्पूर्ण कार्यकाल में किसानों की आत्महत्याएं कितनी हुई,महिलाओं पर अत्याचार कितना हुआ, अपराधों की वृद्धि कितनी हुई,जैसे लोकायुक्त द्वारा पकड़े गए अधिकारी-कर्मचारी,स्वास्थ्य के मामले में हम अग्रणी हैं,जैसे कुपोषण,शिशु मृत्यु दर,स्वास्थ्य सेवाओं की अधोसंरचनाl नौकरी के इतने अवसर दिए हैं कि,युवा वर्ग नौकरी के अभाव में आत्महत्या करता है या पढ़े-लिखे अपराधी बन गए हैंl उन्होंने अपना व्यवसाय स्वयं ढूंढ लिया हैl कुछ तो कारागृह में रहते हैं या रेल की पटरी परl सब ही भूमि शिवराज की होने से खूब अवैध खनन होता है और होता रहेगा,तथा जिन्होंने अपने कर्त्तव्य का पालन किया,उसे स्वर्गवासी बना दिया जाता हैl वह चाहे पुलिस हो,जंगल विभाग या खनिज विभागl इस कार्यकाल में सबका बहुत विकास हुआl
इस समय हिंदुत्व,मंदिर-मस्जिद,हिन्दू-मुस्लिम का मुद्दा बहुत आक्रामक होता है,जबकि होना चाहिए नौकरीl हमारे मुख्यमंत्री ने इतने अधिक समझौते किए हैं उद्योगों से,पर वो कही नहीं दिखाई दे रहेl कितना जनता के पैसों का अपव्यय हो रहा है,कहीं `नर्मदा नमामि` में या नर्मदा के वृक्षारोपण में या बच्चों को साइकिल प्रदाय,आदिवासियों को पट्टे के मामलों में या गरीबी रेखा के नीचे वालों को भवन निर्माण,या शौचालयों के निर्माण में या बैंक सुविधाओं में जब इतना सब-कुछ कर दिया है,तब उन्हें निश्चिन्त होकर रहना चाहिए,पर बेचैन हैं शिव जीl

परिचय- डॉ.अरविन्द जैन का जन्म १४ मार्च १९५१ को हुआ है। वर्तमान में आप होशंगाबाद रोड भोपाल में रहते हैं। मध्यप्रदेश के राजाओं वाले शहर भोपाल निवासी डॉ.जैन की शिक्षा बीएएमएस(स्वर्ण पदक ) एम.ए.एम.एस. है। कार्य क्षेत्र में आप सेवानिवृत्त उप संचालक(आयुर्वेद)हैं। सामाजिक गतिविधियों में शाकाहार परिषद् के वर्ष १९८५ से संस्थापक हैं। साथ ही एनआईएमए और हिंदी भवन,हिंदी साहित्य अकादमी सहित कई संस्थाओं से जुड़े हुए हैं। आपकी लेखन विधा-उपन्यास, स्तम्भ तथा लेख की है। प्रकाशन में आपके खाते में-आनंद,कही अनकही,चार इमली,चौपाल तथा चतुर्भुज आदि हैं। बतौर पुरस्कार लगभग १२ सम्मान-तुलसी साहित्य अकादमी,श्री अम्बिकाप्रसाद दिव्य,वरिष्ठ साहित्कार,उत्कृष्ट चिकित्सक,पूर्वोत्तर साहित्य अकादमी आदि हैं। आपके लेखन का उद्देश्य-अपनी अभिव्यक्ति द्वारा सामाजिक चेतना लाना और आत्म संतुष्टि है।

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