शीतल रात में…

डॉ.नीलम कौर
उदयपुर (राजस्थान)
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रात सितारों ने भी अब तो
कोहरे की चादर ओढ़ ली,
चाँद भी लिपट गया झीनी
सी चदरिया में,
ठंड में सिहरती हवा भी
सरसरा रही।

रात शीतल थरथरा रही,
अपनी-अपनी कोटर में
खामोश परिंदे सो रहे।

शहर,गाँव,कस्बे,गली,
सड़कें भी सूनी हो रहीं।

कभी दूर सन्नाटे में,
चीख मारती रेल गुजरती…
कहीं-कहीं कुछ गाड़ी-मोटर भी ठंडी सड़कों पर दौड़ती।

हाँ,मजबूर बेचारे रब के बंदे,
रब को याद करते हैं…
ठिठुरती सर्दी में अपने को ही ओढ़, बेचारे फुटपाथ पे
सो जाते हैं॥

परिचय – डॉ.नीलम कौर राजस्थान राज्य के उदयपुर में रहती हैं। ७ दिसम्बर १९५८ आपकी जन्म तारीख तथा जन्म स्थान उदयपुर (राजस्थान)ही है। आपका उपनाम ‘नील’ है। हिन्दी में आपने पी-एच.डी. करके अजमेर शिक्षा विभाग को कार्यक्षेत्र बना रखा है। आपका निवास स्थल अजमेर स्थित जौंस गंज है।  सामाजिक रुप से भा.वि.परिषद में सक्रिय और अध्यक्ष पद का दायित्व भार निभा रही हैं। अन्य सामाजिक संस्थाओं में भी जुड़ाव व सदस्यता है। आपकी विधा-अतुकांत कविता,अकविता,आशुकाव्य और उन्मुक्त आदि है। आपके अनुसार जब मन के भाव अक्षरों के मोती बन जाते हैं,तब शब्द-शब्द बना धड़कनों की डोर में पिरोना और भावनाओं के ज्वार को शब्दों में प्रवाह करना ही लिखने क उद्देश्य है।

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