शुभ-अशुभ का भय

वकील कुशवाहा `आकाश महेशपुरी`
कुशीनगर(उत्तर प्रदेश)

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वे हमें समझा-बुझाकर लूट लेते हैं,
शुभ-अशुभ का भय दिखाकर लूट लेते हैं।
ये दिशा शुभ,ये दिशा बरबाद कर देगी,
इस दिवस को ये दिशा आबाद कर देगी।
जाल भ्रम का ये बिछाकर लूट लेते हैं-
शुभ-अशुभ का भय दिखाकर लूट लेते हैं।
ये जगह अच्छी नहीं है घर बनाने को,
ये भवन तैयार तुमको काट खाने को।
आजकल क्या-क्या बताकर लूट लेते हैं-
शुभ-अशुभ का भय दिखाकर लूट लेते हैं।
काट ले बिल्ली डगर तो अपशकुन होगा,
छींक आ जाए अगर तो अपशकुन होगा।
हाय बातों में फँसाकर लूट लेते हैं-
शुभ-अशुभ का भय दिखाकर लूट लेते हैं।
लग्न के जो बिन अगर कुछ भी करोगे तुम,
पाप की गठरी लिए कैसे तरोगे तुम।
झूठ का परदा चढ़ाकर लूट लेते हैं-
शुभ-अशुभ का भय दिखाकर लूट लेते हैं॥
परिचय-वकील कुशवाहा का साहित्यिक उपनाम आकाश महेशपुरी है। इनकी जन्म तारीख २० अप्रैल १९८० एवं जन्म स्थान ग्राम महेशपुर,कुशीनगर(उत्तर प्रदेश)है। वर्तमान में भी कुशीनगर में ही हैं,और स्थाई पता यही है। स्नातक तक शिक्षित श्री कुशवाहा क़ा कार्यक्षेत्र-शिक्षण(शिक्षक)है। आप सामाजिक गतिविधि में कवि सम्मेलन के माध्यम से सामाजिक बुराईयों पर प्रहार करते हैं। आपकी लेखन विधा-काव्य सहित सभी विधाएं है। किताब-‘सब रोटी का खेल’ आ चुकी है। साथ ही विभिन्न पत्र- पत्रिकाओं में रचनाओं का प्रकाशन हो चुका है। आपको गीतिका श्री (सुलतानपुर),साहित्य रत्न(कुशीनगर) शिल्प शिरोमणी सम्मान(गाजीपुर)प्राप्त हुआ है। विशेष उपलब्धि-आकाशवाणी से काव्यपाठ करना है। आकाश महेशपुरी की लेखनी का उद्देश्य-रुचि है। 

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  1. संपादन के उपरांत
    ★★★शुभ अशुभ का भय★★★

    वे हमें समझा बुझाकर लूट लेते हैं
    शुभ अशुभ का भय दिखाकर लूट लेते हैं

    यह दिशा शुभ, यह दिशा बरबाद कर देगी
    इस दिवस को यह दिशा आबाद कर देगी
    जाल भ्रम का ये बिछाकर लूट लेते हैं-
    शुभ अशुभ का भय दिखाकर लूट लेते हैं

    यह जगह अच्छी नहीं है घर बनाने को
    यह भवन तैयार तुमको काट खाने को
    आजकल क्या क्या बताकर लूट लेते हैं-
    शुभ अशुभ का भय दिखाकर लूट लेते हैं

    काट ले बिल्ली डगर तो अपशकुन होगा
    छींक आ जाए अगर तो अपशकुन होगा
    व्यर्थ बातों में फँसाकर लूट लेते हैं-
    शुभ अशुभ का भय दिखाकर लूट लेते हैं

    लग्न के जो बिन यहाँ कुछ भी करोगे तुम
    पाप की गठरी लिए कैसे तरोगे तुम
    झूठ का परदा चढ़ाकर लूट लेते हैं-
    शुभ अशुभ का भय दिखाकर लूट लेते हैं

    गीत- आकाश महेशपुरी

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