श्रीगणेश वंदना

ओम अग्रवाल ‘बबुआ’
मुंबई(महाराष्ट्र)
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हे गिरिजासुत शिवासुनंदन,इतनी आप कृपा करना,
मनमंदिर में मेरे प्रभुवर,आठों याम बसा करना।
रिद्धि-सिद्धि के दाता स्वामी,इतना-सा उपकार करें,
देश धरा पर नेह स्नेह का,प्रभुवरश्री संचार करें।
धरतीपुत्र किसानों पर भी,नित-नित आप दया करना,
मनमंदिर में मेरे प्रभुवर…॥
बहन-बेटियाँ नहीं सुरक्षित,जीवन भी संतापित है,
यूँ लगता है आज नारियाँ,जाने क्यूँ अभिशापित हैं।
उनके जीवन में भी खुशियाँ,प्रभुवर आप भरा करना,
मनमंदिर में मेरे प्रभुवर…॥
दीन-दुखी निबलों-विकलों के,नयनों में  नित पानी है,
सूखा हो या बाढ़ प्रभु ये,नित-नित नई कहानी है।
ऐसे सूखे अधरों पर भी,कुछ मुस्कान धरा करना,
मनमंदिर में मेरे प्रभुवर…॥
आतंकवाद का दंश झेलती,पुण्यधरा भी घायल है,
झंकारों की जननी अब तो,चीख उगलती पायल है।
दुखहर्ता-सुखकर्ता प्रभुवर,दुख दारिद्र हरा करना,
मनमंदिर में मेरे प्रभुवर…॥
सत्य अहिंसा भाईचारा,स्वस्थ सुखी संसार रहे,
नेह स्नेह की सरिता में नित,प्रीत प्रेम की धार बहे।
आशाओं के उपवन सूखे,उनको आप हरा करना,
मनमंदिर में मेरे प्रभुवर,आठों याम बसा करना॥
परिचय-ओमप्रकाश अग्रवाल का साहित्यिक उपनाम ‘बबुआ’ है।आप लगभग सभी विधाओं (गीत, ग़ज़ल, दोहा, चौपाई, छंद आदि) में लिखते हैं,परन्तु काव्य सृजन के साहित्यिक व्याकरण की न कभी औपचारिक शिक्षा ली,न ही मात्रा विधान आदि का तकनीकी ज्ञान है।आप वर्तमान में मुंबई में स्थाई रूप से सपरिवार निवासरत हैं ,पर बैंगलोर  में भी  निवास है। आप संस्कार,परम्परा और मानवीय मूल्यों के प्रति सजग व आस्थावान तथा देश-धरा से अपने प्राणों से ज्यादा प्यार है। आपका मूल तो राजस्थान का झूंझनू जिला और मारवाड़ी वैश्य है,परन्तु लगभग ७० वर्ष पूर्व परिवार उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में आकर बस गया था। आपका जन्म १ जुलाई को १९६२ में प्रतापगढ़ में और शिक्षा दीक्षा-बी.कॉम.भी वहीं हुई है। आप ४० वर्ष से सतत लिख रहे हैं।काव्य आपका शौक है,पेशा नहीं,इसलिए यदा-कदा ही कवि मित्रों के विशेष अनुरोध पर मंचों पर जाते हैं। लगभग २००० से अधिक रचनाएं आपने लिखी होंगी,जिसमें से लगभग ७०० का शीघ्र ही पाँच खण्डों मे प्रकाशन होगा। स्थानीय स्तर पर आप कई बार सम्मानित और पुरस्कृत होते रहे हैं। आप आजीविका की दृष्टि से बैंगलोर की निजी बड़ी कम्पनी में विपणन प्रबंधक (वरिष्ठ) के पद पर कार्यरत हैं। कर्नाटक राज्य के बैंगलोर निवासी श्री  अग्रवाल की रचनाएं प्रायः पत्र-पत्रिकाओं और काव्य पुस्तकों में  प्रकाशित होती रहती हैं। आपकी लेखनी का उद्देश्य-जनचेतना है।     

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