श्री अटल जी

पुष्पा अवस्थी ‘स्वाति’ 
मुंम्बई(महाराष्ट्र)

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अश्रु भरे नयनों से तुमको,देखे दुनिया सारी।
अजर-अमर हो बसे दिलों में,सबके अटल बिहारी।

रहा हमेशा सादा जीवन,छल-प्रपंच से दूर,
बने देश के राजा फिर भी,आया नहीं गुरुर।
हरदम सबको याद रहेगी, जो खेली तुमने पारी,
अश्रु भरे नयनों से देखे तुमको दुनिया सारी॥

जाने कितना दर्द छुपाए,अपने अंतर्मन में,
फिर भी खुशियां बांट रहे थे,देश के जन-जन में।
इसीलिए जनमानस ने तुमरी आरती उतारी,

अश्रु भरे नयनों से देखे तुमको दुनिया सारी॥

जोश भरी आवाज तुम्हारी,कही हुई हर बात,
अनुसरणीय लगती है,हमको तुम्हारी ये सौगात।

बन के याद रहेगी दिल में अब से प्रीत तुम्हारी,
अश्रु भरे नयनों से देखे तुमको दुनिया सारी॥

भारत रत्न विभूषित तुम हो,कवियों के सिरमौर,
देश के जनमानस में तुमने,बना लिया है ठौर।
दरवाजे पे मौत प्रतीक्षा,करती रही तुम्हारी,

अश्रु भरे नयनों से देखे तुमको दुनिया सारी॥
 परिचय-पुष्पा अवस्थी का उपनाम-स्वाति है। आपकी शिक्षा एम.ए.(हिंदी साहित्य रत्न)है। जन्म स्थान-कानपुर है। आपका कार्यक्षेत्र स्वयं का  व्यवसाय(स्वास्थ्य सम्बंधी)है। वर्तमान में पुष्पा अवस्थी मुंम्बई स्थित कांदिवली(वेस्ट)में बसी हुई हैं। इनकी उपलब्धि बीमा क्षेत्र में लगातार तीन साल विजेता रहना है। प्रकाशित पुस्तकों में-भूली बिसरी यादें(ग़ज़ल-गीत कविता संग्रह)एवं तपती दोपहर के साए (ग़ज़ल संग्रह)है। 

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