‘संजू’…कई राज खोलेगी

इदरीस खत्री
इंदौर(मध्यप्रदेश)
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पूर्व समीक्षा………………………….
दोस्तों,संजय दत्त की ज़िंदगी किसी फिल्मी कथा से कम नहीं रही हैl राजकुमार ने बायोपिक बनाकर निश्चित ही कोई सट्टा नहीं खेला हैl संजय का ज़िंदगीनामा हर भारतीय जानना चाहता हैl नाम,शोहरत,पैसा अगर आता है तो नशा,सेक्स,पीछे से दबे पांव आना लाजमी हैl जैसे गाड़ी खरीदी तो पेट्रोल लाजमी होगा,वैसे ही नाम,शोहरत,पैसा जब पैरों तले आता है तो,नशा,लड़कियां आना लाजमी होगा,नहीं तो वह शख्स सन्त ही होगा जो बच निकले इससेl ख़ैर,संजू पर कुछ तथ्य पता चले हैं जो फ़िल्म में होंगे या नहीं,इसका इंतजार रहेगाl संजू की ज़िंदगी में प्रेम,नशा,जेल, हथियार,मिलना-बिछड़ना,त्रासदी,योग-संयोग,बम विस्फोट,दंगे,फिल्मी उतार-चढ़ाव,कोर्ट-कचहरी,पोलिस,सज़ा का ऐसा मिश्रण है,जो फ़िल्म के लिए वाजिब मसाला हैl
पिता देश में शासित दल के सांसद होने के साथ सफल कलाकार,माता भी आले दर्जे की सितारा,देश के सबसे बड़े गांधी घराने में आना-जाना रसूख तो पैदा करता ही हैl नरगिस जब सुनील दत्त से शादी करना चाहती थी,तो राज कपूर राजी नहीं थे तो,इंदिरा गांधी ने राजकपूर को फोन पर समझाया (या कहें धमकाकर चुप किया था,तो गलत न होगा शायद)थाl   सुनील दत्त ने `मदर इंडिया` फिल्म में शूटिंग में लगी आग में से जान जोखिम में डालकर नरगिस को बचाया था,तब से नरगिस,सुनील पर मोहित हो गई थी,लेकिन राज कपूर-नरगिस के प्रेम प्रसंग देशभर की फिल्मी किताबों-अखबारों की रौनक थेl राज कपूर, नरगिस को खोना नहीं चाहते थे,लेकिन नरगिस ने राज की मनमानी इंदिरा गांधी को बताई तो,इंदिरा ने दोस्ती के नाते हस्तक्षेप कियाl इंदिरा का कद उस वक्त इतना बड़ा था कि,राजकपूर बात नहीं मानते तो शायद देश छोड़ना पड़ जाताl खैर,यह थी सुनील-नरगिस की भूमिका,जिनके आंगन में संजू खिलाl नरगिस का असली नाम फातिमा रशीद थाl १९५९ में संजू ने दत्त परिवार में जन्म लियाl सुनील दत्त-नरगिस फातिमा सफल कलाकारों में शुमार थेl संजू के पैदा होने से पहले  नरगिस सुनील ने एक पत्रिका में विज्ञापन दिया कि,लड़का-लड़की का नाम तजवीज(सुझाव) करोl उसमें एक नाम आया `संजय`l नरगिस को यह नाम इतना पसन्द आया कि उन्होंने कहा कि-लड़का हुआ तो नाम `संजय` रखेंगें,और संजय की शुरूआत हुईl
संजय जब ९ साल के थे,तब पहली बार पिता की ऐश-ट्रे में पड़ी आधी सिगरेट जलाकर पी थी,लेकिन यह हरकत बढ़ती चली गईl सुनील ने अपनी राजनीतिक गुरु इंदिरा गांधी से विचार किया तो संजू को बोर्डिंग स्कूल भेजने की सलाह दी गईl फिर उस पर अमल कर लिया गया,तो संजू ९ साल बाद वहां से वापस आएl  संजू आगे पढ़ना नहीं चाहते थे,लेकिन सुनील दत्त स्नातक तक करने पर अड़े रहे और उनका दाखिला मुम्बई के एलबेन्स्ट महाविद्यालय में करवाया गया,पर संजू पहले साल में मात्र या २ दिन ही महाविद्यालय गएl यही वह वक्त था जब संजू को तेज नशे की आदत पड़ गई थीl
महाविद्यालय के दिनों में उन्हें अभिनेता बनने का विचार मन में आयाl उन्होंने यह बात सुनील दत्त से साझा कीl
सुनील दत्त ने कहा-आसान नहीं है,पहले 2 साल अभिनय सीख लो,फिर बात करेंगेl संजू फौरन तैयार हो गएl संजय की पहली फ़िल्म के प्रदर्शन के दौरान नरगिस का कैंसर अंतिम पड़ाव में थाl फ़िल्म प्रदर्शित हुई ८ मई को तथा ३ मई को नरगिस दुनिया से रुखसत हो गई तो संजय ने थियेटर में एक सीट खाली छोड़ी अपनी माँ की याद मेंl
टीना मुनीम ओर संजय `रॉकी` के सेट पर मिले थे और संजय उन्हें अपना दिल दे बैठेl दोनों का २ साल तक प्रेम प्रसंग भी चला,लेकिन नशाखोरी के चलते और चिड़-चिड़े व्यवहार के कारण यह रिश्ता टूट गयाl `रॉकी` की आउटडोर शूटिंग के दौरान एक आदमी टीना को छेड़ रहा था,तो संजू ने उस आदमी को खूब मारा थाl संजू ने खुद यह बात कुबूल की थी एक साक्षात्कार के दौरानl दोनों के अलग होने के बावजूद संजय,टीना के लिए समर्पित थेl टीना-ऋषि कपूर की एक फ़िल्म शूट में उठे मामले पर संजू अपने दोस्त गुलशन ग्रोवर के साथ ऋषि कपूर को उनके घर मारने पहुँच गए थे,तो नीतूसिंह ने मामला निपटाया थाl उसी दौर में संजू बहुत खुली अदाकारा किमी काटकर के चक्कर में पड़ गए,लेकिन नशेबाजी के चलते यह भी खत्म हो गयाl
नशे के चलते एक दिन संजू सोकर उठे तो उनके नौकर उनकी हालत देखकर रोने लगे थे,क्योंकि संजू २ दिन बाद सोकर उठे थे,लेकिन संजू ने खुद को नशे से अलग करने का मन बना लिया और अपने पिता से नशा मुक्ति केन्द्र जाने की बात कीl
सुनील दत्त ने उन्हें अमेरिका के एक नशा मुक्ति केन्द्र भिजवा दिया,जहां वह एक शख्स से मिले जिसने संजू को अमेरिका में खेती-बाड़ी के कामकाज का न्योता दिया और संजू ने वहीं रूककर काम करने का मन बना लिया,पर सुनील दत्त ने कहा कि-एक बार फिल्मों में फिर कोशिश कर लोl
संजू ने अनमने मन से फिर फिल्मों का रूख कियाl
संजू अमेरिका के नशा मुक्ति केन्द्र  में विदेशी अभिनेता अर्नाल्ड श्वाजरेगर की फिल्में देखकर प्रेरित हो गए थे। भारत आते ही उन्होंने शरीर सौष्ठव (बॉडी बिल्डिंग)पर काम शुरु कर दिया।
इसके बाद संजू ने २ फिल्म की लेकिन दोनों पूरी तरह असफल साबित हुई। इसमें एक थी ‘जान की बाजी’। अब संजू को एक अदद सफल फिल्म की ज़रूरत थी,जो महेश भट्ट से फ़िल्म ‘नाम’ के रुप मे मिली।
यहीं से शुरू हुई फिल्मों में संजू की दूसरी पारी। ‘नाम’ की कामयाबी ने संजू को फिर से स्थापित कर दिया।  समीक्षकों ने संजू के अभिनय का लोहा माना। ‘नाम’ के साथ संजू को फिल्में मिलने लगी।
सन १९९६ संजू के लिए बढ़िया जा रहा था,नशा करने की समस्या खत्म हो गई थी। तभी उनकी मुलाकात ऋचा शर्मा से हुई। दोनों  की मुलाकात के बाद एक साल में शादी कर ली। १९९८ में संजू के घर में बेटी त्रिशा का जन्म हुआ। ६ महीने बाद ही पत्नी को ब्रेन ट्यूमर की बीमारी ने घेर लिया,और ऋचा को अमेरिका (न्यूयार्क) के उसी अस्पताल में दाखिल किया,जहां नरगिस का इलाज हुआ था।
संजू के लिए वह वक्त बेहद मशक्कत भरा था,क्योंकि एक तरफ भविष्य,दूसरी तरफ अमेरिका में भर्ती पत्नी।
इसी दौर में संजू,माधुरी दीक्षित पर मोहित हो गए और दोनों का प्रेम प्रसंग भी रहा। ऋचा ने कई साक्षात्कार में खुला कहा है कि, माधुरी के कारण उनकी शादीशुदा जिंदगी खराब हुई है। सूत्रों की मानें तो संजय के जेल जाने के कारण माधुरी ने खुद को अलग कर लिया और कभी जेल में मिलने भी नहीं गई। इसी कारण दोनों ने फिर कभी कोई फ़िल्म साथ नहीं की।
इधर ऋचा एवं संजय की तलाक की प्रक्रिया शुरू हुई तो बेटी त्रिशा की देखभाल संजू ने मांगी,लेकिन संजू के परिवार ने कहा-वह बच्ची अमेरिका में पली है,उसे वहीं बड़ा होने दिया जाए ऋचा के परिवार के साथ ही। जब त्रिशा १० साल की हुई तो संजू को उसकी जिम्मेदारी मिली। यहां संजू के परिवार ने बच्ची को अमेरिका में ही रहने की सलाह दी,पर अपने घर आने-जाने की कोई पाबंदी भी नहीं रखी। आज भी संजू बेटी से जुड़े हुए हैं।
फ़िल्म ‘साजन’ के लिए आमिर खान को राजी किया गया था,पर  आमिर किसी नए निर्देशक के साथ काम नहीं करना चाहते थे,तो यह किरदार संजय को मिला। यही वह फ़िल्म थी जिसके लिए संजू पहली बार ‘फ़िल्म फेयर’ के लिए नामित हुए।
१९९२ की फ़िल्म ‘यलगार’ वैसे तो नाकामयाब फिल्मों में शुमार होती है,लेकिन फ़िल्म के निर्माता- निर्देशक फिरोज खान ने संजय की मुलाकात दुबई में दाऊद से करवाई थी,ऐसा माना जाता है। यहीं से शुरू हुआ था अंडरवर्ल्ड कनेक्शन।
फ़िल्म ‘सनम’ के निर्माता समीर हिंगोरा ओर हनीफ जिनके साथ संजय फ़िल्म कर रहे थे,उन्होंने संजय को कुछ हेंड ग्रेनेड और  ३ बंदूकें उपलब्ध करवाई थी,जैसा मुम्बई पोलिस ने बताया।
संजय ने एक बंदूक रख ली और पोलिस को बयान दिया कि,खुद की और परिवार की सुरक्षा के लिए बंदूक रख ली थी। न्यायालय ने नहीं माना और तर्क दिया कि आपके पास ३ लायसेंस हथियार जब है तो अवैध हथियार क्यों ?
मुम्बई बम धमाके के बाद समीर तथा हनीफ गिरफ्तार हुए तो पता चला कि दोनों अंडरवर्ल्ड डॉन अबू सलेम के लिए काम करते हैं। इसी कड़ी में संजय दत्त भी गिरफ्तार हुए।
‘मुन्ना भाई एमबीबीएस’ के लिए राजकुमार हिरानी और विधू विनोद की पहली पसंद शाहरुख खान थे,  लेकिन शाहरुख ने मना कर दिया तो यह किरदार संजय की झोली में आया। फिर शुरू हुई संजय की तीसरी फिल्मी पारी,जिसमें संजय को अपार सफलता मिली। इसी फिल्म में संजय एवं सुनील दत्त ने पर्दा साझा किया।
इससे पहले ‘रॉकी’ तथा ‘क्षत्रिय’  फिल्म में भी दोनों ने साथ काम किया,लेकिन पर्दा साझा पहली बार इसी फिल्म में किया।
इस फ़िल्म के अंत में सुनील दत्त, संजय से बोलते हैं-‘तेरी माँ को तो बहुत झप्पी दी है तूने,आज जादू की झप्पी मुझे भी दे दे।’
यह दृश्य इतना ज्यादा भावनात्मक था कि,तो दोनों बाप-बेटे गले लगते हैं और दृश्य ‘कट’ के बाद भी बहुत देर तक अलग नहीं होते हैं।
फ़िल्म ‘ब्लफ मास्टर’ में जो किरदार अभिषेक बच्चन ने किया था,वह किरदार संजय को प्रस्तावित था और रितेश देशमुख वाला किरदार अभिषेक को,लेकिन संजय तारीख की परेशानी के चलते बात नहीं जमी,तो फ़िल्म अभिषेक की झोली में चली गई।
जब ऋचा तथा संजय का रिश्ता असहज था,तभी उनकी ज़िंदगी में   ‘मान्यता’ आई,जो संघर्षरत अभिनेत्री थी। संजय ने ही फ़िल्म ‘गंगाजल’ में आइटम गीत के लिए इनकी सिफारिश की थी।
उन्हीं दिनों मान्यता ने एक फ़िल्म की थी ‘लवर्स लाइक अस’ जो बेहद खुले दृश्यों से भरपूर थी। बाद में संजय ने इस फ़िल्म के तमाम अधिकार खरीद लिए और बाजार  से सीडी-डीवीडी तक उठवा ली थी। फिर २००८ में संजू ने मान्यता से विवाह कर लिया।
२००९ में संजय ने समाजवादी दल  के साथ राजनीति में प्रवेश किया,
लेकिन उच्चतम न्यायालय ने मामला विचारधीन होने के कारण
उनका चुनाव नामांकन रद्द कर दिया,जो नियमानुसार था।
फ़िल्म ‘अग्निपथ'(२०१२)के किरदार कांचा चीना के लिए नाना पाटेकर पहली पसंद थे,पर नाना के मना करने पर संजू को यह नकारात्मक भूमिका मिली। संजू ने यह भूमिका निभाई और अभिनय  एक नया रुप प्रस्तुत किया।
इस किरदार के लिए संजू को खूब तारीफें मिली।
संजय दत्त रॉक म्यूजिक बहुत पसंद करते हैं। उनके पसंदीदा बैंड-गन्स एंड रोसेस,पिंक फ्लोईड हैं। जब २०१२ में गन्स एण्ड रोसेस का कार्यक्रम मुम्बई(भारत) में हुआ था तो संजू ने अपनी निजी वैनिटी वैन मुहैया करवाई थी।
२०१३ में जब वह वक्त आया कि उच्चतम न्यायालय ने संजू को ५ साल की सज़ा पर मुहर लगाई। इसमें संजू १८ महीने की सज़ा काट चुके थे तो बाकी सज़ा के लिए संजू जेल गए।
जेल से पैरोल पर संजू बार-बार बाहर आ रहे थे। पैरोल कुल मिलाकर ६ महीने की थी,जेल में संजू पेपर बैग के अलावा जेल के कैदियों के लिए ‘आर.जे.’ का काम भी करते थे।
पेपर बैग से हुई कुल कमाई ३० हज़ार रूपए संजू ने जेल की कैंटीन में खर्च कर दिए थे। कुल ४५० रुपए बचे थे जो उन्होंने अपनी पत्नी मान्यता को दे दिए थे। यहां संजू के अच्छे चाल-चलन को देखते हुए ६० दिन पहले ही रिहा कर दिया गया। जेल से निकलते वक्त संजू ने जेल में लगे राष्ट्रध्वज को सलामी दी और धोक देकर सम्मान जताया,साथ ही खुद के बदलाव सबसे बयान किए। इसके बाद संजू की पहली फ़िल्म आई ‘भूमि’। संजू चाहते थे फ़िल्म उनकी बेटी त्रिशा के जन्मदिन पर प्रदर्शित हो। तब फ़िल्म की प्रदर्शन तारीख को 12 अगस्त किया गया,जो संजय की बेटी के जन्मदिन की तारीख है।
फ़िल्म ‘संजू’ के लिए सुनील दत्त का किरदार संजय खुद करना चाहते थे लेकिन फिर आमिर को प्रस्ताव दिया गया। आमिर ‘दंगल’ के बाद बूढ़ा किरदार नहीं करना चाहते थे, तो परेश रावल को अंतिम रुप से तय किया गया।
हमारे पास संजय दत्त से जुड़े हुए
यह कुछ तथ्य थे,जो आप अब अगले महीने फिल्म ‘संजू’ में देखेंगे। इसमें से कितने तथ्य ‘संजू’ में देखने को मिलेंगे,यह फिल्म ही बताएगी।
परिचय : इंदौर शहर के अभिनय जगत में १९९३ से सतत रंगकर्म में इदरीस खत्री सक्रिय हैं,इसलिए किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। परिचय यही है कि,इन्होंने लगभग १३० नाटक और १००० से ज्यादा शो में काम किया है। देअविवि के नाट्य दल को बतौर निर्देशक ११ बार राष्ट्रीय प्रतिनिधित्व नाट्य निर्देशक के रूप में देने के साथ ही लगभग ३५ कार्यशालाएं,१० लघु फिल्म और ३ हिन्दी फीचर फिल्म भी इनके खाते में है। आपने एलएलएम सहित एमबीए भी किया है। आप इसी शहर में ही रहकर अभिनय अकादमी संचालित करते हैं,जहाँ प्रशिक्षण देते हैं। करीब दस साल से एक नाट्य समूह में मुम्बई,गोवा और इंदौर में अभिनय अकादमी में लगातार अभिनय प्रशिक्षण दे रहे श्री खत्री धारावाहिकों और फिल्म लेखन में सतत कार्यरत हैं। फिलहाल श्री खत्री मुम्बई के एक प्रोडक्शन हाउस में अभिनय प्रशिक्षक हैंl आप टीवी धारावाहिकों तथा फ़िल्म लेखन में सक्रिय हैंl १९ लघु फिल्मों में अभिनय कर चुके श्री खत्री का निवास इसी शहर में हैl आप वर्तमान में एक दैनिक समाचार-पत्र एवं पोर्टल में फ़िल्म सम्पादक के रूप में कार्यरत हैंl 

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