सकारात्मक पथ

कीर्ति जायसवाल
प्रयागराज(उत्तरप्रदेश)
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प्रसरित हो वह सूर्य-लालिमा;
रजनी-चंद्रिका प्रसरित हो।
शुष्क पड़ा; जन हो उद्विग्न;
बाढ़ लहर लहराई हो।
तप्त करे यह सूर्य की ऊष्मा;
हिम-वृष्टि नहलायी हो।
क्या ऐसा भी हो सकता!
‘पतझड़ ऋतु में हरियाली हो।
है जग में कुछ भी न असंभव,
विजय का दूजा नाम ही संभव।
आए अर्क जो अमेरिका में;
आए देश में चंद्रिका।
शुष्क पड़ी भूखंड हो ‘बांदा’;
बाढ़ यहाँ पर आयी हो।
च्युत तुषार तो जम्मू में;
लू राजस्थान में आयी हो।
किसी देश में पतझड़ हो तो
किसी देश में हरियाली।
विजय का दूजा नाम ही ‘संभव’,
सकारात्मक पथ चुन ले॥
(इक दृष्टि इधर भी:प्रसरित-फैलना,रजनी चंद्रिका-रात चाँदनी,शुष्क-सूखा,उद्विग्न-परेशान,ऊष्मा-गर्मी,तप्त करे-जलाए,हिम-वृष्टि-बर्फ की बारिश,अर्क-सूर्य,च्युत-गिरना,तुषार-बर्फ)
परिचय-कीर्ति जायसवाल की जन्मतिथि १ नवम्बर १९९५ है। निवास स्थान  का स्थाई पता-गांव रघुवंशपुर उर्फ रेरुआ मन्सूराबाद(पोस्ट),जिला इलाहाबाद( उत्तरप्रदेश)है। आप एम.ए.में अध्ययनरत होकर लेखन विधा में कविता रचती हैं। कीर्ति जायसवाल की प्रकाशित रचना(कविता)-मछली,मेरा गाँव रघुवंशपुर आदि प्रमुख हैं। आपको बाबू बालमुकुंद गुप्त हिन्दी साहित्य सेवा सम्मान-२०१७ सहित काव्य रंगोली साहित्य भूषण सम्मान-२०१७ से सम्मानित किया गया है।  

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