सच्चा दशहरा

तारा प्रजापत ‘प्रीत’
रातानाड़ा(राजस्थान) 
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(विजयादशमी विशेष)
संवेदना को जैसे
पक्षघात हुआ,
भावना अपाहिज  हुई
नाम पे 
आधुनिकता के,
सभ्यता ख़ारिज हुई।
हो रही है, 
आज कुंठित
इंसान की
इंसानियत,
कैसा ये 
युग परिवर्तन है,
कैसी ये सियासत ?
सो गई है मानवता, 
और जाग उठी
हैवानियतl 
पाप की लंका जलाने,
क्या कोई 
आएगा हनुमान ?
कब तक प्रतीक्षा करें,  
श्री राम की
क्या कभी,
राम आएंगे बचाने
सत्य की सीता को ?
आओ हम सब
प्रतिनिधित्व करें राम का,
मारकर स्वयं
अपने भीतर के 
दूषित विचारों के
रावण को,
बचा लें अपनी
सत्य की सीता को।
हर के अपनी 
दस इंद्रियों को,
आओ मनायें 
सच्चा दशहराll 
परिचय-श्रीमती तारा प्रजापत का उपनाम ‘प्रीत’ है।आपका नाता राज्य राजस्थान के जोधपुर स्थित रातानाड़ा स्थित गायत्री विहार से है। जन्मतिथि १ जून १९५७ और जन्म स्थान-बीकानेर (राज.) ही है। स्नातक(बी.ए.) तक शिक्षित प्रीत का कार्यक्षेत्र-गृहस्थी है। कई पत्रिकाओं और दो पुस्तकों में भी आपकी रचनाएँ प्रकाशित हुई हैं,तो अन्य माध्यमों में भी प्रसारित हैं। आपके लेखन का उद्देश्य पसंद का आम करना है। लेखन विधा में कविता, हाइकु, मुक्तक, ग़ज़ल रचती हैं। आपकी विशेष उपलब्धि-आकाशवाणी पर कविताओं का प्रसारण होना है।

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