सच का होता है दमन

जितेन्द्र वेद 
इंदौर(मध्यप्रदेश)
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जब सत्ता की संगत से गधों का होता चयन,
तब घोड़ों को पड़ते हैं रात और दिन कोड़े।  
 
सच का होता है सुबह से शाम तक दमन,
बिके बाजार में ईमानदार बचे हैं बहुत थोड़े।
 
अनपढ़ करते हैं शक्ति का लगातार प्रदर्शन,
पढ़े-लिखे तैयारी करते हैं तलने की पकौड़े।
 
जो रह गया देश में,उसे नहीं मिलता अमन,
दिन-रात मजे कर रहे कूच कर गए भगोड़े।
 
हत्या-बलात्कार की बातें सुनकर भीगते नयन,
पर वे उगाते मतों की फसल छूकर इतिहास के फोड़े।
 
जातिवाद से गड्ड-मड्ड  यह समाज और वतन,
इस गैर बराबरी की दौड़ में क्यों बला सब दौड़े।
 
आशियानों को संभालने का करते हैं सब जतन,
अन्यथा चारों तरफ दिखते बुलडोजर और हथौड़ेll 
परिचय-जितेन्द्र वेद की जन्मतिथि १९ अप्रैल १९६० तथा जन्म स्थान इंदौर हैl आपका वर्तमान निवास भी यहीं हैl मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी माने जाने वाले इंदौर के श्री वेद ने स्नातक की पढ़ाई की हैl कार्यक्षेत्र में आप सरकारी विद्यालय में व्याख्याता एवं हिंदी के शिक्षक(हैदराबाद) भी हैंl आप लेखन की सभी विधाओं में कार्य करते हैंl विभिन्न समाचार पत्रों में आपकी ढेर सारी रचनाएँ प्रकाशित हुई हैंl आपकी लेखनी का उद्देश्य भावों की अभिव्यक्ति करना हैl

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