सड़क

सत्येन्द्र प्रसाद साह’सत्येन्द्र बिहारी’
चंदौली(उत्तर प्रदेश)
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रुकती थकती विश्राम नहीं,
बढ़ती और मचलती जाती
अंतहीन अनन्त की ओर,
परावार पथिक की चाल
हासिल मंजिल मुझसे क्योंकि,
मैं जीवन पथ की सड़क हूँ।

उन्मुक्त अन्तरिक्ष का नभचर,
ना बंधन अवरोध मेरा
हर ओर कुलांचे भरती,
सीधी-सपाट ना रूप रेख
चलती बस चलती जाती क्योंकि,
मैं अम्बर पथ की सड़क हूँ।

भूत भविष्य वर्तमान,
अनन्त काल का सार
ना टूटती ना बिखरती,
समय का लपेटे चिर
देखती-मुस्कुराती बढ़ती क्योंकि,
मैं समय पथ की सड़क हूँ।

हर पल बदलता स्वरूप,
पुष्प पल्लवित मकरंद धूप
उड़ती जाती तितली बनकर,
नाचती छिटकी कुंज की ओर
उठती-गिरती और संभलती क्योंकि,
मैं धूप-छांव की खड़ी सड़क हूँ।

हाहाकार प्रचण्ड त्रास चहुंओर,
त्राहिमाम उठती चीत्कार वीभत्स
उखड़ते द्रूम फटते अम्बुद,
विक्षिप्त शव प्रकृति का तांडव
टूटती साँसें बिखरती पगडंडियां क्योंकि,
मैं मलय देश की जीर्ण सड़क हूँ।

गौरव गाथा जंबू द्वीप की,
मोती मैं राजनीति सीप की
कभी मगध मैं कभी इंद्रप्रस्थ,
सल्तनत काल से राजपथ
उत्थान पतन की साक्षी क्योंकि,
मै दिल्ली के राजपथ की सड़क हूँ।

लुटती अस्मत फटता चीर,
वीभत्स आँखें,बहती आँखों से पीर
मारती हाथ-पांव तमाशा देखती भीड़,
बेहयाई जमाने की ढकती हिमचीर
संज्ञाशून्य मानव दोजक समाज क्योंकि,
मैं पतित पावन सभ्यता की टूटती सड़क हूँ॥

परिचय-सत्येन्द्र प्रसाद साह का निवास जिला-चंदौली(उत्तर प्रदेश)में हैl इनका साहित्यिक उपनाम-सत्येन्द्र बिहारी हैl जन्म तारीख १७ मार्च १९८५ एवं जन्म स्थान-बिहार राज्य हैl ग्राम सैयदराजा निवासी श्री साह ने स्नातकोत्तर की शिक्षा पाई है और कार्यक्षेत्र-नौकरी हैl आपकी लेखन विधा-कविता हैl हिंदी का भाषा ज्ञान रखने वाले सत्येन्द्र बिहारी की लेखनी का उद्देश्य-हिंदी को समृद्ध करना हैl

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