सताया सवेरे-सवेरे…

पारस गुप्ता  ‘शायर दिल से’ 
चन्दौसी(उत्तर प्रदेश)
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अभी दिल दुखाया सवेरे-सवेरे…।
सनम याद आया सवेरे-सवेरे…।

निगाहों में मेरी है तस्वीर उसकी…,
बहुत ही रुलाया सवेरे-सवेरे…।

जफा क्या वफ़ा क्या है क्या बेवफाई…,
हमें क्यूँ सताया सवेरे-सवेरे…।

दिलों में सुलगता है वफ़ा का धुआं है…,
हमें क्यूँ जलाया सवेरे-सवेरे…।

मुहब्बत दिलों में तो मिलती नहीं है…,
जो नफरत दिखाई सवेरे-सवेरे…।

ये आँखें भरी हैं नहीं तुमने देखा…,
न रुख को मिलाया सवेरे-सवेरे…।

जवाबों की तासीर झूठी बनी फिर…,
सवालात आया सवेरे-सवेरे…।

कहेगा लिखेगा यही दिल से ‘पारस’…,
तुम्हीं ने भुलाया सवेरे-सवेरे….॥

परिचय-पारस वार्ष्णेय का साहित्यिक उपनाम-पारस गुप्ता ‘शायर दिल से’ है। १९९४ में ६ दिसम्बर को चन्दौसी (सम्भल) में जन्मे हैं। वर्तमान में चन्दौसी (सम्भल)में ही बसेरा है। शहर चन्दौसी(उत्तर प्रदेश) निवासी श्री वार्ष्णेय की शिक्षा बीएससी एवं एमएससी (गणित)है। आपका कार्यक्षेत्र अध्यापक (गणित)का है। इनकी लेखन विधा- ग़ज़ल,गीत,मुक्त,मुक्तक आदि है। कुछ सम्मान भी प्राप्त किए हैं। विशेष उपलब्धि में आई.आई.टी. की परीक्षा तथा अन्य कई परीक्षा उत्तीर्ण करना है। लेखनी का उद्देश्य-शौक पूरा करना तथा हर दिल पर राज करना  है। आपकी विशेषज्ञता-हिन्दी ग़ज़ल को तरन्नुम में लिखने की है। 

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